नई दिल्ली. Supreme Court of India ने Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हालांकि अदालत ने विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून को बिना पूरी सुनवाई के अंतरिम आदेश से रोका नहीं जा सकता।
बड़ी बेंच को भेजी गई तीन याचिकाएं
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और Vipul M Pancholi शामिल थे, ने तीन याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेज दिया।
ये याचिकाएं डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म The Reporters Collective, पत्रकार नितिन सेठी और National Campaign for People’s Right to Information (NCPRI) की ओर से दायर की गई हैं।
याचिकाओं में “डेटा फिड्यूशियरी” से जुड़ी धाराओं पर चिंता जताई गई है, जिनके तहत केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर किसी भी डेटा फिड्यूशियरी से जानकारी मांग सकती है।
RTI और निजता के अधिकार के बीच संतुलन का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला सूचना का अधिकार (RTI) और निजता के अधिकार जैसे दो मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
पीठ ने कहा: “यह प्रतिस्पर्धी हितों के बीच संतुलन का प्रश्न है और हमें तय करना होगा कि व्यक्तिगत जानकारी की परिभाषा क्या होगी।”
RTI कानून में संशोधन पर विवाद
याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से DPDP Act की धारा 44(3) को चुनौती दी है, जो Right to Information Act, 2005 की धारा 8(1)(j) में संशोधन करती है।
इस संशोधन के बाद व्यक्तिगत जानकारी के खुलासे पर व्यापक छूट मिल जाती है, जबकि पहले सार्वजनिक हित होने पर ऐसी जानकारी साझा की जा सकती थी।
अगली सुनवाई मार्च में
अदालत ने मामले को “जटिल और संवेदनशील” बताते हुए कहा कि नए विधायी ढांचे की गहन जांच आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई मार्च में तय की गई है।
