नई दिल्ली. जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को जांच के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने समिति से पेलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों से जुड़ी हिंसा तथा संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करने को कहा है।
HPEC का गठन बदलने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने HPEC की संरचना में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया। कुछ याचिकाकर्ताओं ने समिति की निष्पक्षता और गठन को लेकर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा कि समिति ने अभी अपनी जांच शुरू भी नहीं की है, इसलिए उसके खिलाफ पहले से कोई धारणा बनाना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति का उद्देश्य मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच में अदालत की सहायता करना है। समिति को किसी एक पक्ष के हित में काम करने के बजाय मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करनी होगी।
पेलेट गन के इस्तेमाल की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने HPEC की प्राथमिकताओं में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल को शामिल किया है। इससे पहले भी अदालत ने दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल से संबंधित नियमों और बल प्रयोग की प्रक्रिया का रिकॉर्ड मांगा था।
अब समिति इस पहलू के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की परिस्थितियों और उससे जुड़े अन्य आरोपों की भी जांच करेगी।
महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में
समिति को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित लक्षित हिंसा और उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को लगी चोटों, हिंसा की घटनाओं और संपत्ति को हुए नुकसान से जुड़े मामलों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
इस तरह HPEC को प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के अलग-अलग पक्षों की जांच करनी होगी, ताकि मामले से जुड़े तथ्य सामने आ सकें।
संवेदनशील गवाहों की पहचान रहेगी गोपनीय
सुप्रीम कोर्ट ने उन संवेदनशील और कमजोर गवाहों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है, जो समिति के सामने बयान देना चाहते हैं। ऐसे गवाहों की पहचान गोपनीय रखने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि गवाहों के बयान और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों की गोपनीयता बनाए रखी जाए। इससे संबंधित लोगों को बिना पहचान सार्वजनिक हुए समिति के सामने जानकारी देने का अवसर मिलेगा।
सबूत जमा करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े लोगों के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया है। इसके जरिए गवाह और अन्य संबंधित लोग दस्तावेज और सबूत समिति के सामने जमा कर सकेंगे।
ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध होने से मामले से जुड़ी जानकारी समिति तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है, साथ ही संवेदनशील जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
दो वरिष्ठ वकील बनाए गए Amici Curiae
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और C. Solomon को मामले में Amici Curiae नियुक्त किया है। वे अदालत की सहायता करेंगे और मामले में स्वतंत्र भूमिका निभाएंगे।
कोर्ट ने HPEC को जल्द से जल्द एक Member Secretary नियुक्त करने का भी निर्देश दिया है, जो समिति के प्रशासनिक और अन्य जरूरी कार्यों में सहायता करेगा। समिति को अपनी पहली रिपोर्ट भी जल्द दाखिल करने को कहा गया है।
14 साल की प्रदर्शनकारी की सुरक्षा का मामला
मामले में 14 वर्षीय एक लड़की की सुरक्षा का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। अदालत को बताया गया कि प्रदर्शन में शामिल लड़की और उसके परिवार को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लड़की और उसके परिवार को मिली कथित धमकियों का आकलन करने और जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पुलिस को धमकी और उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की जल्द जांच करने को भी कहा गया है।
दिल्ली पुलिस को इस मामले में अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से क्या स्पष्ट है?
अदालत के ताजा निर्देशों के बाद HPEC की जांच का दायरा स्पष्ट हो गया है। समिति को पेलेट गन के कथित इस्तेमाल से लेकर महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोप, पुलिसकर्मियों की चोट, हिंसा और संपत्ति के नुकसान तक विभिन्न पहलुओं की जांच करनी है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल समिति को दोबारा गठित करने की मांग स्वीकार नहीं की है और उसे जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
