नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की जल्द या समय से पहले रिहाई को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे कैदियों की समय से पहले रिहाई के लिए एक समान और मानवीय नीति तैयार करें। कोर्ट ने कहा कि यह नीति तीन महीने के भीतर बनाकर लागू की जाए, ताकि पूरे देश में ऐसे मामलों पर एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जा सके।
तीन महीने में बनानी होगी नई नीति
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की रिहाई के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह निर्देश जारी किया।
ई-प्रिजन्स पोर्टल से जुड़ेगी पूरी प्रक्रिया
अदालत ने यह भी कहा कि समय से पहले रिहाई के लिए आने वाले सभी आवेदन और उनकी प्रक्रिया को ई-प्रिजन्स पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और हर मामले की निगरानी आसान हो सकेगी।
मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिक उम्र या गंभीर बीमारी से जूझ रहे कैदियों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। इसलिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट नीति बनाकर ऐसे मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना चाहिए।
