नई दिल्ली. Vrindavan स्थित प्रसिद्ध Shri Banke Bihari Mandir के नियंत्रण को लेकर जारी विवाद पर Supreme Court ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने मंदिर को ‘private property’ कहे जाने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जहां लाखों भक्त रोज़ दर्शन करने आते हैं, उसे private temple नहीं माना जा सकता। Justices Surya Kant और Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि देवता निजी नहीं हो सकते, भले ही प्रबंधन निजी हो। मंदिर का स्वरूप सार्वजनिक है, और यह केवल कुछ व्यक्तियों की संपत्ति नहीं हो सकता।
“Govt control vs Temple trust”: यूपी अध्यादेश पर उठे सवाल
यह मामला UP Government द्वारा लाए गए Ordinance से जुड़ा है, जिसके जरिए बांके बिहारी मंदिर का नियंत्रण एक सरकारी ट्रस्ट को सौंपने की योजना है। इस अध्यादेश को कई याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए Senior Advocate Shyam Divan ने तर्क दिया कि यह मंदिर एक private religious institution है और राज्य सरकार द्वारा उसका प्रशासनिक अधिकार छीनना state control थोपने जैसा है।
मंदिर प्रबंधन में पारंपरिक समिति की भूमिका
याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि मंदिर का संचालन पारंपरिक रूप से Goswami families और Braj community के चुनिंदा सदस्यों द्वारा होता आया है। प्रबंधन समिति का चुनाव हर तीन साल में होता है। हालांकि, 2016 के बाद कोई नया चुनाव नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “ट्रस्ट के पैसे जेबों में क्यों जाएं?”
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मंदिर में हर साल करोड़ों श्रद्धालु आते हैं, आप इसे निजी कैसे कह सकते हैं? ट्रस्ट का पैसा मंदिर के विकास पर खर्च होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।” कोर्ट ने ये भी साफ किया कि सरकार का उद्देश्य मंदिर की संपत्ति को हड़पना नहीं, बल्कि infrastructure development है।
अंतरिम समाधान: Court द्वारा proposed panel
ताकि मामले की सुनवाई पूरी होने तक मंदिर का daily administration ठीक से चलता रहे, कोर्ट ने एक interim management committee बनाने का सुझाव दिया है। यह समिति: एक रिटायर्ड हाईकोर्ट या सीनियर जिला जज की अध्यक्षता में होगी Crowd management, Security, और Facilities improvement जैसे काम देखेगी Goswami परिवार धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी पारंपरिक भूमिका निभाते रहेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि विकास कार्यों के लिए इस समिति को fund allocation दिया जा सकता है, लेकिन ट्रांसपेरेंसी के साथ।
अभी कोई अंतिम फैसला नहीं, High Court में होगी संवैधानिक सुनवाई
Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल constitutional validity पर कोई फैसला नहीं दे रहा है। वह जिम्मेदारी पहले Allahabad High Court की है। साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को mediation के लिए तैयार होने की सलाह दी।
“भगवान श्रीकृष्ण भी पहले मध्यस्थ थे… हम भी आपसे यही उम्मीद रखते हैं,” जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की।
अगली सुनवाई 5 अगस्त को
इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त, सुबह 10:30 बजे होगी। इसमें अस्थायी समिति के गठन पर सुप्रीम कोर्ट अंतिम निर्देश दे सकता है।
