नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 के री-एग्जाम को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल परीक्षा को पेन-एंड-पेपर मोड से हटाकर CBT में बदलने का कोई आधार नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणी
यह मामला न्यायमूर्ति Justice P S Narasimha और न्यायमूर्ति Justice Aravind Kumar की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि NEET-UG री-एग्जाम को CBT मोड में बदलने का प्रश्न ही नहीं उठता, खासकर जब पहले से ही परीक्षा प्रक्रिया में कई प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियां सामने आ चुकी हैं।
NTA की मौजूदा चुनौतियों का हवाला
कोर्ट ने यह भी माना कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था National Testing Agency (NTA) पहले से ही परीक्षा रद्द होने के बाद कई तरह की व्यवस्थागत और लॉजिस्टिक समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे में नए प्रारूप को तुरंत लागू करना व्यावहारिक नहीं माना गया।
CBT मोड की मांग क्यों उठी थी
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि री-एग्जाम को डिजिटल यानी CBT मोड में कराया जाए ताकि पारदर्शिता बढ़े और पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की संभावना कम हो सके। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को वर्तमान परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किया।
अगली सुनवाई जुलाई में तय
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख दी है। उस दिन इस मुद्दे पर विस्तृत विचार किया जाएगा और सभी पक्षों की दलीलों को सुना जाएगा।
परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बढ़ी निगरानी
NEET-UG परीक्षा से जुड़े मामलों पर हाल के समय में लगातार विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आती रही हैं। इसी कारण अदालत और NTA दोनों ही परीक्षा प्रणाली को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह की अनियमितता से बचा जा सके।

