केंद्र सरकार ने लोकसभा में चीनी को एथनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट करने की नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और गन्ना किसानों को समय पर Fair and Remunerative Price (FRP) का भुगतान करने में मदद मिली है। सरकार ने हालांकि साफ किया कि देश की food security उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। गन्ने की उत्पादकता और biofuel विस्तार से जुड़े एक सवाल के लिखित जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतिभाई बांभणिया ने यह जानकारी लोकसभा में दी।
घरेलू खपत के बाद अतिरिक्त चीनी से एथनॉल उत्पादन
मंत्री ने बताया कि सरकार चीनी मिलों को घरेलू खपत की जरूरत पूरी होने के बाद केवल अतिरिक्त चीनी को एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार हर sugar season में गन्ने और चीनी के उत्पादन के अनुमान की नियमित निगरानी करती है, ताकि देश में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहे और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी मिलती रहे।
सरकार के अनुसार, अतिरिक्त गन्ने और चीनी का एथनॉल उत्पादन में उपयोग करने से चीनी मिलों को अतिरिक्त liquidity मिलती है। इससे मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और वे किसानों को गन्ने की कीमत का भुगतान समय पर कर पाने में सक्षम होती हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से हर साल FRP में की जाने वाली बढ़ोतरी से भी गन्ना किसानों को लाभ मिल रहा है।
चावल से एथनॉल बनाने पर भी सरकार का स्पष्टीकरण
लोकसभा में सरकार ने rice-based ethanol को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ने बताया कि Food Corporation of India (FCI) के चावल को एथनॉल उत्पादन के लिए तभी इस्तेमाल किया जाता है, जब वह अतिरिक्त मात्रा में उपलब्ध हो। इससे पहले National Food Security Act (NFSA), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और buffer stock से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जाता है।
सरकार ने कहा कि खाद्य सुरक्षा से किसी तरह का समझौता किए बिना ही अतिरिक्त खाद्यान्न का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन के लिए किया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक तरफ खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना और दूसरी तरफ देश में biofuel production को बढ़ावा देना है।
एथनॉल के लिए मक्का बना बड़ा कच्चा माल
सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए मक्का को भी बढ़ावा दिया है। मंत्री के अनुसार, maize as ethanol feedstock को प्रोत्साहित करने से एथनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के स्रोतों में विविधता आई है। मक्का अब blending के लिए इस्तेमाल होने वाले एथनॉल की आपूर्ति में सबसे बड़ा feedstock बनकर उभरा है।
इससे एथनॉल उद्योग को केवल गन्ने या चीनी पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग कृषि उत्पादों से कच्चा माल प्राप्त करने का विकल्प मिला है। सरकार इसे देश की biofuel policy और ethanol blending programme के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
28 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा मिशन
मंत्री ने बताया कि Department of Agriculture and Farmers Welfare की ओर से National Food Security and Nutrition Mission (NFSNM) लागू किया जा रहा है। यह मिशन पहले National Food Security Mission (NFSM) के नाम से जाना जाता था। इसे 28 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं, में लागू किया जा रहा है।
इस मिशन का उद्देश्य चावल, गेहूं, मक्का, जौ और Shree Anna जैसे खाद्यान्नों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है। इसके दायरे में गन्ने जैसी commercial crops को भी शामिल किया गया है। सरकार का जोर कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय और खेती की स्थिरता को मजबूत करने पर है।
किसानों को समय पर भुगतान और टिकाऊ खेती पर जोर
सरकार ने कहा कि अतिरिक्त गन्ने का एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल चीनी मिलों को आवश्यक liquidity उपलब्ध कराता है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही सरकार टिकाऊ और संसाधन-कुशल खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को भी लागू कर रही है।
इन योजनाओं में कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन और खेती से जुड़े जोखिमों को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे फसल खराब होने का खतरा घट सकता है और गन्ना किसानों के लिए लंबे समय में अधिक टिकाऊ कृषि व्यवस्था तैयार हो सकती है। इस पूरी नीति में सरकार ने food security, farmer payments और ethanol production के बीच संतुलन बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।

