नई दिल्ली. Supreme Court of India ने बुधवार को Election Commission of India द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वैध ठहराते हुए कहा कि वोटर लिस्ट का संशोधन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार है और यह उसके संवैधानिक दायरे में आता है।
चुनाव आयोग ने अधिकारों से बाहर जाकर काम नहीं किया: कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि कानून खुद चुनाव आयोग को विशेष परिस्थितियों में वोटर लिस्ट का विशेष संशोधन करने की अनुमति देता है। इसलिए केवल इस आधार पर SIR को अवैध नहीं कहा जा सकता कि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग है।
Article 324 के तहत चुनाव आयोग को अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के Article 324, Representation of the People Act, 1950 और उससे जुड़े नियमों के तहत चुनाव आयोग को SIR कराने का पूरा अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया कानून और संविधान दोनों के अनुरूप है।
निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है वोटर लिस्ट अपडेट
कोर्ट ने माना कि वोटर लिस्ट को अपडेट रखना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का अहम हिस्सा है। अदालत के अनुसार यह चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाए रखे।
नागरिकता तय नहीं करता चुनाव आयोग
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह हो, तो आयोग मामला केंद्र सरकार के पास भेज सकता है।
SIR प्रक्रिया में लोगों को मिले पर्याप्त मौके
अदालत ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान लोगों को अपने दस्तावेज जमा करने, सुधार कराने, आपत्ति दर्ज करने और अपील करने के पर्याप्त अवसर दिए गए। इसलिए इस प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने SIR नियमों को बताया उचित
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी करना, जानकारी सार्वजनिक करना, संदिग्ध मामलों की व्यक्तिगत जांच और अपील का अधिकार देना—ये सभी कदम निष्पक्ष प्रक्रिया की कसौटी पर खरे उतरते हैं।
बिहार में पहले चरण में हुआ था SIR
गौरतलब है कि बिहार में SIR का पहला चरण पूरा किया गया था। इस दौरान चुनाव आयोग ने आंकड़े जारी कर बताया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 65 लाख नाम हटाए गए।
याचिकाओं में उठाए गए थे अधिकारों पर सवाल
SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग को इतने बड़े स्तर पर वोटर लिस्ट संशोधन का अधिकार नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए SIR को संवैधानिक और कानूनी रूप से सही ठहराया।

