नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के उर्वरक (फर्टिलाइजर) सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक FY27 में भारत का खाद सब्सिडी बिल बजट अनुमान से काफी ज्यादा जा सकता है। इसकी मुख्य वजह यूरिया, डीएपी, प्राकृतिक गैस और अन्य कच्चे माल की आयात लागत में तेज बढ़ोतरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे खरीफ सीजन में तत्काल आपूर्ति संकट की संभावना कम है, लेकिन बढ़ती आयात निर्भरता और वैश्विक कीमतों में उछाल सरकार की चिंता बढ़ा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज संकट से बढ़ी चिंता
13 मई को जारी सेक्टर रिपोर्ट में CareEdge Ratings ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के आसपास जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की उर्वरक आयात पर निर्भरता को उजागर कर दिया है।
अमोनिया, सल्फर, यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे भारत के लिए उर्वरक आयात महंगा हो गया है।
सामान्य से कम बारिश का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। अनुमान के मुताबिक इस साल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92 प्रतिशत रह सकती है।
हालांकि जलाशयों का जलस्तर अभी बेहतर स्थिति में है और खरीफ फसलों का रकबा भी बढ़ रहा है।
FY26 में तेजी से बढ़ी आयात निर्भरता
रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर रहा, जबकि उर्वरकों की खपत करीब 3 प्रतिशत बढ़ गई। FY25 में 518 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के मुकाबले FY26 में उत्पादन घटकर करीब 517 लाख मीट्रिक टन रह गया।
इस अंतर को पूरा करने के लिए आयात में भारी वृद्धि करनी पड़ी। FY25 में जहां करीब 160 लाख मीट्रिक टन आयात हुआ था, वहीं FY26 में यह बढ़कर लगभग 249 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया। इसके साथ ही कुल आयात निर्भरता 23 प्रतिशत से बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई।
यूरिया और DAP में सबसे ज्यादा दबाव
भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरक यूरिया और DAP पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिल रहा है।
FY26 में यूरिया उत्पादन लगभग 293 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। मार्च 2026 में गैस आपूर्ति घटने से उत्पादन प्रभावित हुआ। वहीं बफर स्टॉक बनाने के लिए यूरिया आयात बढ़कर करीब 115 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया।
FY25 में भारत के 73 प्रतिशत यूरिया आयात पश्चिम एशिया के देशों—ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई—से आए थे। FY26 में भी पश्चिम एशिया का हिस्सा 37 प्रतिशत रहा, जिसमें अकेले ओमान का योगदान 17 प्रतिशत था।
DAP आयात पर भारी निर्भरता
DAP की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। FY26 में DAP के लिए भारत की आयात निर्भरता करीब 68 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा है।
सिर्फ सऊदी अरब से ही भारत ने FY26 के पहले 10 महीनों में 40 प्रतिशत DAP आयात किया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में DAP की कीमत बढ़कर लगभग 900 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पहुंच गई है, जो संकट से पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है।
सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ
DAP का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) सरकार ने ₹27,000 प्रति मीट्रिक टन तय किया हुआ है, जबकि सब्सिडी ₹30,000 प्रति मीट्रिक टन दी जा रही है। इसके बावजूद आयात आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
सरकार द्वारा ₹3500 प्रति मीट्रिक टन का विशेष DAP पैकेज देने के बाद भी कंपनियों को लगभग ₹23,000 प्रति मीट्रिक टन की अंडर-रिकवरी हो रही है।
गैस और कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल
मार्च 2026 के बाद अमोनिया की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत और सल्फर में 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत अपनी 80 प्रतिशत से अधिक अमोनिया और सल्फर जरूरतें खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में हॉरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।
इसके अलावा आयातित प्राकृतिक गैस की स्पॉट कीमत अप्रैल 2026 में 10 डॉलर प्रति MMBtu से बढ़कर 15 डॉलर प्रति MMBtu से ऊपर पहुंच गई।
FY26 में उर्वरक उद्योग की 85 प्रतिशत गैस जरूरतें आयात से पूरी हुईं, जिनमें 63 प्रतिशत गैस खाड़ी देशों से आई। अकेले कतर का योगदान 45 प्रतिशत रहा।
अप्रैल में यूरिया और DAP की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
अप्रैल 2026 में यूरिया की कीमतों में एक महीने में ही 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 950 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई। वहीं DAP की कीमत लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 900 डॉलर प्रति टन हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक इसका मुख्य कारण उर्वरक और गैस सप्लाई रूट्स में बाधाएं हैं।
फिलहाल खरीफ सीजन के लिए स्टॉक पर्याप्त
हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है।
खरीफ सीजन की अनुमानित 390 लाख टन जरूरत के मुकाबले 31 मार्च 2026 तक उर्वरक स्टॉक लगभग 40 प्रतिशत था। अप्रैल 2026 तक यह बढ़कर 49 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि सामान्य स्तर 33 प्रतिशत माना जाता है।
इससे तत्काल सप्लाई संकट का खतरा कम हुआ है, हालांकि समय पर शिपमेंट और विभिन्न उर्वरकों की उपलब्धता अभी भी अहम बनी हुई है।
FY27 में बजट से ज्यादा हो सकता है सब्सिडी खर्च
खाद सब्सिडी FY23 में रिकॉर्ड ₹2.55 लाख करोड़ तक पहुंच गई थी। बाद में कच्चे माल की कीमतें नरम पड़ने से FY24 में यह घटकर ₹1.95 लाख करोड़ और FY25 में ₹1.77 लाख करोड़ रह गई।
लेकिन FY26 में सब्सिडी बिल संशोधित अनुमान ₹1.86 लाख करोड़ से 10 प्रतिशत अधिक रहने की आशंका है।
FY27 के लिए सरकार ने ₹1.71 लाख करोड़ का बजट रखा है, जिसमें ₹1.17 लाख करोड़ यूरिया और ₹54,000 करोड़ न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) योजना के लिए तय किए गए हैं।
CareEdge Ratings का कहना है कि आयात कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए यह बजट वास्तविक जरूरतों से कम पड़ सकता है और सरकार को अतिरिक्त अनुदान देना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर Rabin Bihani ने कहा कि FY27 में उर्वरक उद्योग चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रवेश कर रहा है। गैस और कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनियों की लाभप्रदता और सब्सिडी जरूरतों को प्रभावित करेगा।
वहीं डायरेक्टर Hardik Shah ने कहा कि बेहतर जलाशय स्तर और पर्याप्त स्टॉक फिलहाल राहत दे रहे हैं, लेकिन बढ़ती आयात निर्भरता, लागत में वृद्धि और कमजोर मानसून का अनुमान सेक्टर पर दबाव बनाए रख सकता है।
