ताली बजाने वाले हाथ अब थामेंगे बंदूक

रायपुर. हमारे समाज का वह तबका जिसे अभी तक कुछ लोग हिकारत की नजर से देखते हैं और उन्हें हंसी का पात्र समझते हैं, जल्द ही उनको नई पहचान मिलने जा रही है. छत्तीसगढ़ में जल्द ही पुलिस की वर्दी में किन्नर नजर आएंगे. छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस में अब थर्ड जेंडर भी शामिल करने का फैसला किया है. गृह विभाग ने पुलिस भर्ती में थर्ड ट्रांसजेंडर्स (किन्नरों) से भी आवेदन मंगवाए हैं. जिसके लिए प्रदेशभर से 40 हजार ट्रांसजेंडर्स ने पुलिस आरक्षक की भर्ती के लिए आवेदन किया है.

राजधानी रायपुर से 10, बिलासपुर से 5, धमतरी से 7, भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव और अंबिकापुर से तीन तीन, कोंडागांव और मुंगेली से दो-दो और रायगढ़ व जांजगीर से एक-एक ट्रांसजेंडर युवाओं के आवेदन देने की जानकारी मिली है. ये संख्या बढ़ भी सकती है. ये जवान प्रदेश के 17 नक्सलवाद प्रभावित जिलों में मोर्चा संभालेंगे.

किन्नरों ने जताया खुशी 

किन्नरों की संस्था मितवा की अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य विद्या राजपूत ने रमन सरकार के इस निर्णय पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, प्रदेश के गृह मंत्री रामसेवक पैकरा और डीजीपी एएन उपाध्याय को ट्रांसजेंडरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने छत्तीसगढ़ पुलिस में शामिल होने का अवसर देने के लिए धन्यवाद भी दिया. विद्या राजपूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा.

छत्तीसगढ़ पुलिस ने कुल 2254 आरक्षक के पदों की भर्ती के लिए आवेदन 3 जनवरी से 4 फरवरी तक आमंत्रित किए थे, जिसमें ट्रांसजेंडर्स के कोई आरक्षण का प्रवधान नहीं किया गया है. विज्ञापन में लिखा गया है कि अगर थर्ड जेंडर के अभ्यर्थी फॉर्म भरते हैं तो अभ्यर्थियों को महिला वर्ग के मापदंडों को पूरा करना होगा और उसी हिसाब से शारीरिक क्षमता और दक्षता को देखा जाएगा और यदि पुरुष के कॉलम फॉर्म भरते हैं तो पुरुष अभ्यर्थी के मापदंड को पूरा करना होगा.

गंगा कुमारी ने दिखाया रास्ता 

राजस्थान के जालौर की रहने वाली गंगा कुमारी की मेहनत आखिरकार रंग लाई. लंबे संघर्ष के बाद राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देश पर गंगा कुमारी को राजस्थान पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में नियुक्त किया गया है. वह राज्य की पहली ऐसी किन्नर हैं, जिन्होंने पुलिस फोर्स जॉइन किया है. गंगा वर्ष 2013 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पास हुई थी, लेकिन उसकी नियुक्ति को लेकर पुलिस विभाग और गृह विभाग पशोपेश में था. तीन साल से इस मामले में कोई निर्णय नहीं होने के बाद गंगा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी.

वर्ष 2013 में 12 हजार पदों के लिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा हुई थी. परीक्षा में प्रदेश के सभी जिलों में 1.25 लाख अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था. इसमें से पुलिस ने 11 हजार 400 अभ्यार्थियों का कांस्टेबल पद के लिए चयन कर लिया था; इसमें रानीवाड़ा तहसील के जाखड़ी निवासी गंगाकुमारी पुत्री बीकाराम का भी चयन हुआ था. सभी अभ्यार्थियों का मेडिकल कराया गया तो गंगा के किन्नर होने की पुष्टि हुई.

क्या होते हैं ट्रांसजेंडर्स :

मानव की ऐसी जाति को किन्नर या हिजड़ा कहते हैं जो लैंगिक रूप से न तो नर यानि पुरुष होते हैं न ही मादा यानी स्त्री. यह लोग माता-पिता नहीं बन सकते क्योंकि उनका प्रजनन अंग पूरी तरह विकसित नहीं होता है. सेकेंडरी सेक्सुअल करेक्टर मिक्स होते हैं और कुछ करेक्टर नर वाला व कुछ करेक्टर मादा वाली होती हैं ! इन्हेंथर्ड जेंडर के नाम से जाना जाता है जिसे ट्रांसजेंडर का नाम दिया गया है. हिन्दी में इन्हें किन्नर कहते हैं. उर्दू में इन्हें हिजड़ा कहा जाता है. सरकार एवं समाजिक संगठन इसे ट्रांसजेंडर नाम दिया है यानि कि तीसरे लिंग के रूप में पहचान दी है.

किन्नर का इतिहास काफी पुराना है जबसे मनुष्य जाति धरती पर है तभी से यह हैं. महाभारत और रामायण के पन्नों को पलटेंगे तो पता चलेगा कि वहां पर किन्नर भी रहे हैं. पहले किन्नर राजाओं एवं महाराजाओं के घर पर नाचने और गाने के काम क्या करते थे साथ ही शादी व बच्चों के जन्म पर भी वह नाच-गाना करते थे. शादी में नाच-गाने का काम अभी भी करते हैं जो उनका आय का मुख्य स्रोत है लेकिन कुछ सालों से देह व्यापार में भी शामिल रहे हैं.

मुगल के समय में किन्नरों को राज-दरबारी काम मिला था. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिजड़ों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने इससमुदाय को अपराधी घोषित कर दिया था जबकि 1949 में इस कानून को निरस्त कर दिया गया था. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भारत में किन्नरों को अन्य नागरिकों की तरह सभी मौलिक अधिकार प्राप्त हैं.

माता-पिता नहीं बन सकते 

किन्नर माता पिता नहीं बन सकते हैं लेकिन सवाल उठता है कि किन्नर कैसे पैदा हो जाते हैं ? आपको बता दूं कि किन्नरों का जन्म भी हमारे ही घर में होता है. किन्नर के रूप में जन्मे बच्चे को माता पिता स्वयं किन्नरों के हवाले कर देते हैं या किन्नर खुद उसे ले जाते हैं जिसका वह लालन पोषण करते हैं. मानव जाति का क्रोमोसोम संख्या 46 होता है जिसमें 44 आटोजोम होता है जबकि बाकी दो सेक्स क्रोमोजोम होते हैं. यही दो सेक्स क्रोमोसोम सब कुछ का निर्णय करता है अगर यही दो सेक्स क्रोमोसोम XY है तो वह पुरुष कहलाता है जबकि, XX होने पर महिला कहलाता है. XY और XX क्रोमोसोम के इलावा ( XXX, YY, OX ) क्रोमोसोम वाले मनुष्य को क्रोमोसोमल डिसऑर्डर बोलते हैं जिसे आम भाषा में किन्नर बोलते हैं. जब बच्चा मां के गर्भ में पल रहा होता है कुछ कारणों से क्रोमोजोम नंबर में या क्रोमोसोम की आकृतियों में परिवर्तन हो जाता है जिसके कारण किन्नर पैदा हो जाते है.

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