नई दिल्ली. मानसून के अंतिम दौर में देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। डोलट कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू होने के बीच आने वाले हफ्तों में पूर्वी और मध्य भारत में ज्यादा बारिश देखने को मिल सकती है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना एक अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा था और इसके आगे मजबूत होने की संभावना थी। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत में आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में मौसमी बारिश की कुल कमी 15 फीसदी पर बनी हुई है। इससे पहले लगातार बारिश की कमी बढ़ रही थी, लेकिन इस सप्ताह कई क्षेत्रों में बारिश की स्थिति में सुधार देखने को मिला। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून की स्थिति एक जैसी नहीं है और कई हिस्सों में अभी भी बारिश सामान्य से कम दर्ज की जा रही है।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में थोड़ी राहत
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी पिछले सप्ताह के 29 फीसदी से घटकर 27 फीसदी रह गई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में भी स्थिति में सुधार हुआ है और यहां बारिश की कमी 28 फीसदी से घटकर 26 फीसदी हो गई।
मध्य भारत में बारिश की कमी लगभग 6 फीसदी पर स्थिर रही। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम भारत में स्थिति थोड़ी कमजोर हुई और बारिश की कमी 9 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में बारिश की कमी इस सप्ताह -15 फीसदी पर स्थिर रही, जिससे पहले लगातार बढ़ रही कमी का सिलसिला फिलहाल थमा है।
खरीफ फसलों की बुवाई में सुधार, लेकिन धान अभी पीछे
18 सितंबर तक देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,103.9 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह अंतर अब 15.1 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि एक सप्ताह पहले यह अंतर करीब 16 लाख हेक्टेयर था। यानी कुल खरीफ बुवाई में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अभी भी अंतर बना हुआ है।
फसलों के स्तर पर स्थिति अलग-अलग रही। तिलहन की बुवाई इस सीजन में पहली बार पिछले साल के स्तर से मामूली तौर पर आगे निकल गई। दलहन की बुवाई भी लगभग स्थिर बनी रही।
धान की बुवाई अभी भी चिंता का एक प्रमुख कारण है। 18 सितंबर तक धान का रकबा 429.3 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी समय यह 445.9 लाख हेक्टेयर था। यानी धान का रकबा करीब 16.6 लाख हेक्टेयर कम है। खरीफ बुवाई के कुल अंतर में धान का बड़ा योगदान बना हुआ है।
कपास की बुवाई भी पिछले साल से थोड़ी कम रही। इस साल कपास का रकबा 109.6 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह 110.6 लाख हेक्टेयर था। करीब एक लाख हेक्टेयर का यह अंतर पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग समान रहा। गन्ना, जूट और मेस्टा का रकबा भी बड़े बदलाव के बिना लगभग स्थिर रहा।
जलाशयों में पानी की स्थिति से कुछ राहत
रिपोर्ट में बताया गया कि मध्य और पश्चिमी भारत के जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर से ऊपर बना हुआ है। इससे इन क्षेत्रों में जल उपलब्धता को लेकर कुछ राहत मिलती है। हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में खरीफ बुवाई और जलाशयों के जलस्तर दोनों के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है।
आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव वाले सिस्टम की गतिविधि इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पूर्वी और मध्य भारत में बारिश को सहारा मिल सकता है। मानसून की वापसी के बीच यह बारिश खरीफ फसलों और मिट्टी की नमी के लिए अहम हो सकती है।
2027 तक El Niño रहने का अनुमान
रिपोर्ट में मौजूदा मानसून के बाद की मौसम स्थिति को लेकर भी एक अहम अनुमान दिया गया है। डोलट कैपिटल के मुताबिक, El Niño की स्थिति मजबूत हो रही है और यह 2027 तक बनी रह सकती है। रिपोर्ट ने इसे संभावित रूप से रिकॉर्ड के सबसे मजबूत El Niño घटनाक्रमों में से एक बताया है।
El Niño की लंबी अवधि तक मौजूदगी वैश्विक और क्षेत्रीय मौसम परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारत में बारिश के असमान वितरण, खरीफ फसलों की बुवाई और जलाशयों की स्थिति पर आगे भी नजर बनी रहेगी। हालांकि, भविष्य की वास्तविक बारिश और कृषि परिस्थितियां कई अन्य मौसमी कारकों पर भी निर्भर करेंगी।
फिलहाल मानसून के अंतिम चरण में पूर्वी और मध्य भारत में बारिश बढ़ने की संभावना के बीच देश की कुल बारिश की कमी 15 फीसदी पर बनी हुई है। वहीं, खरीफ बुवाई का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन धान समेत कुछ प्रमुख फसलों का रकबा अभी भी पिछले साल के मुकाबले पीछे है।
