नई दिल्ली. हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य केवल दुनिया की बढ़ती आबादी पर चर्चा करना नहीं, बल्कि परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मातृ स्वास्थ्य, गरीबी, शिक्षा और मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) इस दिन के माध्यम से यह संदेश देता है कि बढ़ती या घटती जनसंख्या का असर हर देश के विकास और संसाधनों पर पड़ता है।
कैसे हुई विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत?
विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत वर्ष 1987 की एक ऐतिहासिक घटना से जुड़ी है। उस समय दुनिया की आबादी पहली बार 5 अरब (5 Billion) के आंकड़े को पार कर गई थी। इसे ‘Day of Five Billion’ के नाम से जाना गया। इसके बाद बढ़ती जनसंख्या को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ी और वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने हर साल इस दिन को मनाने का प्रस्ताव रखा। फिर 1990 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक मान्यता दी और 1991 में पहली बार 90 से अधिक देशों ने विश्व जनसंख्या दिवस मनाया।
इस साल की थीम क्या है?
World Population Day 2026 की थीम है “Realizing the hopes and aspirations of young people, today and for the future.” यानी आज और भविष्य के लिए युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना। इस थीम का उद्देश्य युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और समान अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे आने वाले समय में समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
दुनिया की आबादी 8.1 अरब के पार
वर्तमान में दुनिया की कुल आबादी 8.1 अरब (8.1 Billion) से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2023 में भारत ने चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का स्थान हासिल किया था। भारत की आबादी लगभग 1.45 अरब है और इसकी औसत आयु 29 वर्ष से कम है, जिससे यह दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है।
दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले 8 देश
दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देशों में पहले स्थान पर भारत है, जिसकी आबादी लगभग 1.45 अरब है। दूसरे स्थान पर चीन है, जहां करीब 1.41 अरब लोग रहते हैं। इसके बाद अमेरिका लगभग 34 करोड़, इंडोनेशिया करीब 28.8 करोड़, पाकिस्तान लगभग 25.5 करोड़, नाइजीरिया करीब 23.7 करोड़, ब्राजील लगभग 21.5 करोड़ और बांग्लादेश करीब 17.5 करोड़ की आबादी के साथ शीर्ष आठ देशों में शामिल हैं।
आधी से ज्यादा आबादी सिर्फ इन देशों में रहती है
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी केवल इन आठ देशों में रहती है। वहीं, जापान और इटली जैसे देशों में घटती जन्म दर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी नई चुनौती बन चुकी है। दूसरी ओर भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे देशों में युवा आबादी तेजी से बढ़ रही है।
सिर्फ आंकड़ों का नहीं, भविष्य का भी है यह दिन
विश्व जनसंख्या दिवस केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि बढ़ती आबादी का असर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, पानी, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर कैसे पड़ता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति को बेहतर जीवन, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
