नई दिल्ली. राजस्थान में आगामी Panchayat Elections से पहले ग्रामीण क्षेत्रों पर सरकार का फोकस बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर के माहेश्वरी पब्लिक स्कूल स्थित तक्षशिला ऑडिटोरियम में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी कार्यक्रम से जुड़े।
गांवों के विकास और योजनाओं पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने Rural Development, Public Service और Government Schemes के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि गांवों को मजबूत किए बिना विकास के बड़े लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल है। मुख्यमंत्री ने पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण विकास और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था बताया।
भजनलाल शर्मा ने सरपंचों से अपील की कि सरकारी योजनाओं का लाभ गांव के हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि गांव का कोई जरूरतमंद व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
नवाचार करने वाले सरपंचों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पंचायत स्तर पर उल्लेखनीय काम और नए प्रयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। कई सरपंचों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों और Local Innovation की जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की। इनमें स्वच्छता, बालिका शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़े प्रयास शामिल रहे।
कुछ सरपंचों ने शिक्षा को बढ़ावा देने, छात्राओं के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं विकसित करने और गांव में बर्तन बैंक जैसी पहल शुरू करने के अनुभव भी बताए। मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर किए जा रहे इन प्रयासों को ग्रामीण विकास के लिए उपयोगी बताया।
‘सरपंच साहब’ वाली पहचान का किया जिक्र
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने सरपंच कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरपंच बनने के बाद यह पहचान लोगों के बीच लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज भी जब वे अपने गांव जाते हैं तो लोग उन्हें मुख्यमंत्री के बजाय ‘सरपंच साहब’ कहकर संबोधित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यह पता चलता है कि गांव के लोगों की समस्याओं और जरूरतों के बीच सरपंच की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गांव के लोगों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ का भी जिक्र
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने One State-One Election की दिशा में सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्राम स्तर पर विकास की महत्वपूर्ण इकाई हैं और सरकार पंचायतों के समग्र विकास के लिए रोडमैप तैयार कर रही है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनाव और विकास कार्यों के संदर्भ में कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्यों की निरंतरता प्रभावित हो सकती है और सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए रोजगार के क्षेत्र में नियुक्तियों और चल रही भर्ती प्रक्रियाओं का भी जिक्र किया। ये आंकड़े मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में किए गए दावों के रूप में सामने आए हैं।
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सरपंचों से कहा कि उनके आसपास रहने वाला कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से गांव में लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान के लिए सक्रिय रहने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी समस्या के समाधान में सरकारी स्तर पर दिक्कत आ रही है तो उसकी जानकारी संबंधित स्तर तक पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद मंजू शर्मा सहित अन्य विधायक और पंचायती राज जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रदेश के विभिन्न जिलों से जनप्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।
