नई दिल्ली. भारत की डिजिटल फाइनेंस यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। अब फोकस केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटल पेमेंट और वित्तीय सेवाओं से जोड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस बात पर भी ध्यान दिया जाएगा कि इन सेवाओं से लोगों और कारोबारियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हो रहा है। सितंबर 2026 की एक नई white paper ‘Beyond UPI: Building Finance for the Next Billion’ में डिजिटल फाइनेंस के अगले चरण को इसी दिशा में आगे बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
यह white paper Venture Studios के Founder और CEO Deepak Sharma ने तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही ऐसी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुका है, जो एक अरब से ज्यादा लोगों को financial services से जोड़ने में सक्षम है। अब अगली चुनौती यह है कि इस पहुंच को बेहतर credit, मजबूत financial resilience और बेहतर economic outcomes में बदला जाए।
सिर्फ डिजिटल पेमेंट काफी नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी व्यक्ति या कारोबार की डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच होने मात्र से यह तय नहीं होता कि उसे सही वित्तीय उत्पाद भी मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर कोई दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर सकता है, लेकिन inventory खरीदने के लिए उसे पर्याप्त working capital नहीं मिल पाता। इसी तरह किसी किसान को कर्ज तो मिल जाता है, लेकिन उसकी repayment schedule खेती से होने वाली seasonal income के अनुरूप नहीं होती।
ऐसे में डिजिटल फाइनेंस की अगली पीढ़ी में केवल transaction volume को सफलता का पैमाना मानने के बजाय यह देखना जरूरी होगा कि वित्तीय सेवाओं से ग्राहक की वास्तविक आर्थिक स्थिति में क्या बदलाव आया।
‘Modern Stack 3.0’ का प्रस्ताव
White paper में ‘Modern Stack 3.0’ का एक मॉडल सुझाया गया है, जिसमें identity, payments, consented data, Artificial Intelligence और financial services को आपस में जोड़ने की बात कही गई है।
इस व्यवस्था में ग्राहक से जुड़ी financial information से मिलने वाले संकेत भविष्य में बेहतर financial products तैयार करने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए loan repayment stress, fraud incidents, insurance claims के असफल होने या customer complaints जैसी जानकारी का इस्तेमाल आगे lending और product design से जुड़े फैसलों में किया जा सकता है।
रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि डेटा का इस्तेमाल केवल एक बार की verification तक सीमित न रहे, बल्कि लगातार feedback loop के तौर पर किया जाए।
ULI और Account Aggregator की भूमिका अहम
रिपोर्ट में RBI के Unified Lending Interface (ULI) और Account Aggregator framework को भी महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे के तौर पर देखा गया है। इन व्यवस्थाओं के जरिए ग्राहक की अनुमति से उपलब्ध financial information का इस्तेमाल lenders के लिए credit assessment को आसान बना सकता है।
इससे loan application और assessment की प्रक्रिया में friction कम हो सकती है और lenders को ग्राहक की financial profile को समझने में ज्यादा जानकारी मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक final underwriting, pricing, servicing और outcome की जिम्मेदारी lenders की ही बनी रहेगी।
AI से बढ़ेगी पहुंच, लेकिन जरूरी फैसलों में इंसानी भूमिका
Digital finance के अगले दौर में Artificial Intelligence की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में multilingual AI और assisted digital channels के जरिए ज्यादा लोगों तक financial services पहुंचाने की बात कही गई है।
हालांकि, जिन फैसलों का ग्राहक पर बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है, उनमें human intervention बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। यानी AI का इस्तेमाल सुविधा और पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में मानवीय निगरानी की भूमिका बनी रहनी चाहिए।
सुरक्षा और भरोसा भी जरूरी
डिजिटल फाइनेंस के विस्तार के साथ trust और security को भी केंद्रीय भूमिका देने की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में purpose-bound consent, continuous security, fraud controls और accessible customer recourse को financial products का जरूरी हिस्सा बताया गया है।
इसका मतलब है कि ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि उसका data किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही fraud की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था और शिकायत का आसान समाधान भी उपलब्ध होना चाहिए।
छोटे कारोबारियों, किसानों और Gig Workers पर फोकस
Digital finance की अगली दिशा में उन वर्गों को विशेष महत्व देने की बात कही गई है, जिन्हें अभी भी उचित वित्तीय सेवाएं आसानी से नहीं मिल पातीं। इनमें छोटे merchants, gig workers, farmers और दूसरे underserved segments शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इनके लिए केवल account, payment या loan उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी यह है कि financial product उनकी वास्तविक जरूरत और cash flow के अनुसार हो, ताकि उसका इस्तेमाल लंबे समय में आर्थिक मजबूती बढ़ाने के लिए किया जा सके।
Global South के लिए भारत का अनुभव
White paper में भारत के digital finance model को दूसरे विकासशील देशों के लिए उपयोगी अनुभव के रूप में देखा गया है, लेकिन इसे ज्यों का त्यों दूसरे देशों में लागू करने के बजाय स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग देशों में regulations, languages, digital infrastructure और financial behaviour अलग हो सकते हैं। इसलिए भारत के अनुभव से सीख लेते हुए स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग मॉडल तैयार किए जाने चाहिए।
सफलता का पैमाना भी बदलने की जरूरत
रिपोर्ट में digital finance की सफलता मापने के तरीकों में बदलाव की जरूरत बताई गई है। सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि कितने digital payments हुए या कितने नए users जुड़े।
इसके बजाय यह देखा जाना चाहिए कि loan repayment कितना स्वस्थ रहा, insurance claims का settlement कितना निष्पक्ष रहा, fraud और losses को कितना रोका गया और कितने लोग वास्तव में meaningful तरीके से digital financial services का इस्तेमाल कर पाए।
UPI के बाद अगली चुनौती क्या है?
भारत ने UPI और अन्य digital public infrastructure के जरिए financial access का एक बड़ा आधार तैयार किया है। अब अगली चुनौती इस infrastructure को ऐसे financial outcomes में बदलने की है, जिनसे ग्राहक और कारोबार दोनों लंबे समय में लाभ उठा सकें।

