नई दिल्ली. ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने एक नई पहल शुरू की है। मंत्रालय ने 13 और 14 जुलाई को सात राज्यों के लिए ऑनलाइन वर्कशॉप का आयोजन किया। इन वर्कशॉप का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को यह समझाना था कि वे अपने क्षेत्र के संसाधनों का बेहतर उपयोग करके अपनी आय कैसे बढ़ा सकते हैं और विकास के नए रास्ते कैसे खोल सकते हैं।
सात राज्यों की पंचायतों ने लिया हिस्सा
इस ऑनलाइन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की पंचायतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्हें आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की जानकारी दी गई और बताया गया कि पंचायतें अपनी आय बढ़ाने के लिए नए और उपयोगी प्रोजेक्ट कैसे तैयार कर सकती हैं।
स्थानीय संसाधनों से बढ़ेगी पंचायतों की आय
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि हर पंचायत के पास ऐसे स्थानीय संसाधन और अवसर मौजूद हैं, जिनका सही उपयोग करके आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत पंचायतें ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेंगी। मंत्रालय पंचायतों को तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा।
क्या है आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम?
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पंचायतों की अपनी आय बढ़ाना है, ताकि वे विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें।
इसके तहत पंचायतों से ऐसे नए और उपयोगी प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं, जिनसे गांव में रोजगार बढ़े, खाली पड़ी सरकारी संपत्तियों का उपयोग हो और पंचायत की नियमित आय में बढ़ोतरी हो सके।
कौन-सी पंचायतें कर सकती हैं आवेदन?
इस योजना में वही ग्राम पंचायतें आवेदन कर सकती हैं जिनकी अपनी सालाना आय कम से कम 50 लाख रुपये हो। वहीं, ब्लॉक पंचायतों की अपनी आय कम से कम 1 करोड़ रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा पंचायत का कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष होना भी जरूरी है।
चुनी गई योजनाओं को मिलेगा सहयोग
चयनित योजनाओं को तैयार करने में विशेषज्ञों की मदद दी जाएगी। इसके बाद इन परियोजनाओं के लिए धन की व्यवस्था सरकारी योजनाओं, बैंकों, निजी कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत मिलने वाले सहयोग और अन्य माध्यमों से की जाएगी।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक तथा हाउसिंग और शहरी विकास निगम भी पंचायतों को तकनीकी और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगे।
10 राज्यों तक पहुंचा अभियान
इससे पहले तेलंगाना, गुजरात और केरल में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अब यह अभियान 10 राज्यों तक पहुंच चुका है। मंत्रालय ने देशभर की योग्य पंचायतों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के विकास और आय बढ़ाने के लिए नए विचारों के साथ इस कार्यक्रम में भाग लें।
गांवों के विकास को मिलेगी नई गति
सरकार का मानना है कि यदि पंचायतें अपनी आय बढ़ाने में सफल होती हैं, तो वे गांवों में सड़क, पानी, सफाई, शिक्षा और अन्य विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेंगी। इससे गांवों का समग्र विकास होगा और पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनेंगी।

