नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश में पंचायतों के विकास कार्यों को नई दिशा देने के लिए 16वें वित्त आयोग ने फंड के वितरण और खर्च के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब पंचायतों को मिलने वाले अनुदान का 50 प्रतिशत हिस्सा बंधित (Tied Fund) और 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-बंधित (Untied Fund) होगा।
पहले यह अनुपात 60:40 था, जिसमें अधिक राशि तय कार्यों पर ही खर्च की जा सकती थी। नए बदलाव के बाद पंचायतों को अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों पर अधिक खर्च करने की आजादी मिलेगी।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार खर्च कर सकेंगी पंचायतें
नए नियम लागू होने के बाद पंचायतें गैर-बंधित फंड का उपयोग गांव की जरूरतों के अनुसार कर सकेंगी। इस राशि का इस्तेमाल सड़क निर्माण, नालियों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट लगाने और अन्य स्थानीय विकास कार्यों में किया जा सकेगा। वहीं बंधित फंड का उपयोग पहले की तरह केवल पेयजल, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन और अन्य जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं पर ही किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों को अपने क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनाने और उन्हें तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।
जिला परिषद और बीडीसी के लिए नए निर्देश
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज विभाग ने जिला परिषद (जिला परिषद) और ब्लॉक विकास समितियों (BDC) के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब इन संस्थाओं को वित्त आयोग की राशि से छोटे और सीमित लाभ वाले कार्यों पर खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। जैसे पार्कों में बेंच लगाना, टाइल्स बिछाना या छोटे-मोटे मरम्मत कार्य इस फंड से नहीं कराए जा सकेंगे। इसके बजाय इन संस्थाओं को ऐसे बड़े विकास कार्यों पर ध्यान देना होगा, जिनका लाभ एक से अधिक गांवों को मिले।
बड़े विकास कार्यों पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था के तहत जल संरक्षण, स्वच्छता परियोजनाएं, सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण और कई गांवों को लाभ पहुंचाने वाले विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक लाभ देने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
हिमाचल को मिलेगा 3,744 करोड़ रुपये का आवंटन
16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026 से 2031 के लिए हिमाचल प्रदेश की पंचायतों को 3,744 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है। यह राशि पंचायतों के विकास कार्यों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में खर्च की जाएगी।
सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि से गांवों में विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी।
राज्य सरकार पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव
हालांकि पंचायतों के लिए अधिक फंड का प्रावधान किया गया है, लेकिन दूसरी ओर राज्य सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है। 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश को पहले मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) बंद कर दिया है। इससे राज्य सरकार को अपने वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन अधिक सावधानी से करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों को ज्यादा वित्तीय अधिकार मिलने से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी, लेकिन राज्य सरकार के लिए बजट संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा
नई व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। स्थानीय निकाय अब गांवों की जरूरतों के अनुसार योजनाएं बना सकेंगे और विकास कार्यों को तेजी से पूरा कर पाएंगे।
सरकार को उम्मीद है कि 16वें वित्त आयोग की नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा, विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और पंचायतें स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगी।

