नई दिल्ली. पंचायती राज मंत्रालय ने नई दिल्ली में चार दिन का राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। यह प्रशिक्षण 13 जुलाई से 16 जुलाई तक चलेगा। इसका उद्देश्य ऐसे ट्रेनर को तैयार करना है, जो आगे चलकर ग्राम पंचायतों को पानी का सही उपयोग, जल संरक्षण और भविष्य की जरूरतों के अनुसार जल सुरक्षा योजना बनाने में मदद करेंगे।
पंचायतों के लिए तैयार की गई नई मार्गदर्शिका
इस मौके पर मंत्रालय ने एक नई प्रशिक्षण पुस्तिका भी जारी की है। इसमें बताया गया है कि ग्राम पंचायतें किस तरह गांव के लोगों की भागीदारी से पानी की उपलब्धता का आकलन करें, उसकी जरूरत को समझें और भविष्य के लिए जल संरक्षण की योजना तैयार करें। इसका उद्देश्य गांवों को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।
गांव के लोगों की भागीदारी होगी सबसे अहम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि गांव के लोगों को अपने इलाके की पानी से जुड़ी समस्याओं की अच्छी जानकारी होती है। अगर इसी अनुभव को सही योजना के साथ जोड़ा जाए, तो पानी की कमी जैसी समस्या का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी सफल होगा, जब गांव के लोग खुद इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेंगे और पानी बचाने की आदत अपनाएंगे।
गांव के विकास से जुड़ेंगी जल संरक्षण योजनाएं
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि अब जल संरक्षण की योजनाओं को ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में पानी का बेहतर प्रबंधन होगा और खेती, पेयजल तथा अन्य जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी।
प्रशिक्षण में क्या सिखाया जाएगा?
इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को गांव के जल स्रोतों की जानकारी जुटाना, पानी की उपलब्धता और जरूरत का आकलन करना, वर्षा जल संरक्षण के उपाय अपनाना और पूरे गांव के लिए जल सुरक्षा योजना तैयार करना सिखाया जाएगा। इसके बाद यही प्रशिक्षक अपने-अपने राज्यों, जिलों और ब्लॉकों में अन्य लोगों को भी प्रशिक्षण देंगे।
पहले चरण में 10 राज्यों की 1,000 ग्राम पंचायतें होंगी शामिल
योजना के पहले चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इन राज्यों के 100 जिलों और 100 ब्लॉकों में यह अभियान शुरू होगा।
पानी बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सरकार का मानना है कि अगर गांव स्तर पर पानी का सही प्रबंधन किया जाए, तो भविष्य में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह अभियान न केवल पानी बचाने में मदद करेगा, बल्कि गांवों के विकास और लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाएगा।

