नई दिल्ली. अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घटने का जो “नरेटिव” बनाया जा रहा है, वह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की कुल ताकत कम नहीं होगी बल्कि बढ़ेगी।
दक्षिणी राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 तक पहुंचेंगी
गृह मंत्री ने कहा कि पांच दक्षिणी राज्यों—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि इससे उनकी राजनीतिक शक्ति कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होगी।
| States | Current no of seats | No of seats after delimitation |
| Kerala | 20 | 30 |
| Tamil Nadu | 39 | 59 |
| Karnataka | 28 | 42 |
| Andhra Pradesh | 25 | 38 |
| Telangana | 17 | 26 |
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से किसी भी राज्य को उसकी मौजूदा हिस्सेदारी के अनुपात में नुकसान नहीं होगा।
‘दक्षिण को नुकसान’ वाले दावे को बताया भ्रम
अमित शाह ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जबकि वास्तविकता यह है कि उनकी हिस्सेदारी प्रतिशत के हिसाब से भी स्थिर या बढ़ी हुई रहेगी।
परिसीमन कानून में बदलाव के आरोपों को नकारा
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मौजूदा कानूनों के तहत ही होगी।
2029 से पहले लागू नहीं होगा परिसीमन
उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की सिफारिशें तभी लागू होंगी जब संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलेगी। साथ ही यह भी कहा कि 2029 तक होने वाले चुनाव मौजूदा सीट संरचना पर ही होंगे।
महिला आरक्षण विधेयक भी चर्चा में
सदन में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक भी पेश किया गया, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है। इसके साथ ही अन्य संबंधित विधेयकों पर भी चर्चा चल रही है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष में टकराव जारी
सरकार का दावा है कि यह सुधार लोकतंत्र को मजबूत करेगा, जबकि विपक्ष ने इसके समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा 2029 की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
