नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन (Mahagathbandhan) के अंदर सीट बंटवारे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रमुख सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, बुधवार देर रात राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी के बीच हुई बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। बताया जा रहा है कि सहनी ने कम से कम 20 सीटों की मांग की है, जबकि राजद, कांग्रेस (Congress) और वाम दल (Left parties) उन्हें 12 से 15 सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं हैं।
RJD और Congress आमने-सामने
राजद और कांग्रेस के बीच भी सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ गई है। कांग्रेस ने राजद को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समझौता नहीं हुआ तो पार्टी 13 अक्टूबर से अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर देगी।
कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी आज ऑनलाइन बैठक कर उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देगी। इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) 11 अक्टूबर को इस सूची को मंजूरी दे सकती है। कांग्रेस नेताओं ने 12 अक्टूबर तक सीट बंटवारे पर सहमति बनने की अंतिम समय-सीमा तय की है, जिसके बाद पार्टी पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया शुरू कर देगी।
पटनाः जुटने लगे कांग्रेस के दिग्गज
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और अधीर रंजन चौधरी बुधवार को एक दिन के बिहार दौरे पर पहुंचे थे, लेकिन वे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात नहीं कर पाए।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस बिस्फी, बिहार शरीफ और निर्मली जैसी कुछ राजद-होल्ड सीटों की मांग कर रही है, बदले में वह अपनी कमजोर सीटें छोड़ने को तैयार है। लेकिन इनमें से कई सीटें महागठबंधन के छोटे दलों के खाते में हैं। वहीं राजद चाहता है कि कांग्रेस भागलपुर की कहलगांव सीट छोड़े, लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है।
वाम दलों से भी सीटों पर टकराव
राजद ने वाम दलों (Left parties) से भी चार सीटों की मांग की है, जिनमें पालीगंज और घोसी (दोनों सीपीआई-एमएल के पास) और तरारी शामिल हैं। इसके जवाब में सीपीआई-एमएल ने राजद की तीन सीटों (जैसे इमामगंज) पर दावा ठोका है।
इसी बीच राजद ने सीपीआई से रूपौली सीट मांगी है, जबकि कांग्रेस सीपीएम की बछवारा सीट पर नजर गड़ाए हुए है, जो पिछली बार उनके खाते में थी।इसी बीच राजद ने सीपीआई से रूपौली सीट मांगी है, जबकि कांग्रेस सीपीएम की बछवारा सीट पर नजर गड़ाए हुए है, जो पिछली बार उनके खाते में थी।
महागठबंधन में संकट गहराया
महागठबंधन में सीटों को लेकर चल रही यह रस्साकशी चुनाव से ठीक पहले एकता की तस्वीर को कमजोर कर रही है।
जहां एक ओर मुकेश सहनी अपने राजनीतिक वजूद को बनाए रखने के लिए ज्यादा सीटें चाहते हैं, वहीं राजद और कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक और प्रभाव क्षेत्रों से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
