नई दिल्ली. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 पर एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए तैयारियों की समीक्षा की। कृषि भवन में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी तरह की घबराहट की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है और कृषि उत्पादन व किसानों की आजीविका की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। बैठक में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित एजेंसियों ने हिस्सा लिया।
मॉनसून पूर्वानुमान और जल संसाधनों की स्थिति पर चर्चा
बैठक में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुमान का भी आकलन किया गया, जिसमें बताया गया कि इस वर्ष मानसून वर्षा औसत से लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है, जिससे सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है। साथ ही यह भी संकेत मिला कि मानसून अवधि के दौरान एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देशभर में जलाशयों का जलस्तर सामान्य से अधिक यानी लगभग 127.01 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो खरीफ फसलों के लिए अनुकूल स्थिति प्रदान करता है।
किसानों के लिए समय पर सलाह और वैकल्पिक फसलों की तैयारी पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन राज्यों और जिलों में कम बारिश की आशंका है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर ठोस और व्यवहारिक कंटिंजेंसी प्लान लागू किए जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसानों को तुरंत सलाह, वैकल्पिक बीज और फसल विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने सूखा-प्रतिरोधी और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
बीज आपूर्ति, जल प्रबंधन और तकनीक आधारित कृषि पर फोकस
बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों सीजन के लिए बीजों की पर्याप्त उपलब्धता है और आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय बीज भंडार भी तैयार किया गया है। मंत्री ने निर्देश दिया कि केवल प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज ही किसानों तक पहुंचे। साथ ही जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, फार्म पॉन्ड और वैज्ञानिक जल प्रबंधन को प्राथमिकता देने को कहा गया।
कीट प्रबंधन और डिजिटल कृषि सलाह प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश
मौसम परिवर्तन से संभावित कीट और रोग प्रकोप को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पहले से अलर्ट जारी करने और उपचार योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल अलर्ट, कॉल सेंटर और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से किसानों तक समय पर मौसम और कृषि सलाह पहुंचाने की प्रणाली को और मजबूत करने पर जोर दिया।
केंद्र का आश्वासन: किसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जोखिम का आकलन करना नहीं, बल्कि सक्रिय कदम उठाकर किसानों का भरोसा बनाए रखना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कृषि गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें और खरीफ सीजन प्रभावित न हो।
