नई दिल्ली: देश में संभावित कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने 315 जिलों के लिए व्यापक कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया है। इन जिलों को कृषि संकट से बचाने और किसानों की आजीविका सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और “किसी भी संकट का इंतजार किए बिना पहले से तैयारी” की जा रही है।
111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में, सिंचाई स्थिति सबसे कमजोर
सरकारी आकलन के अनुसार 315 प्रभावित जिलों में से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां सिंचाई कवरेज 25 प्रतिशत से भी कम है। इसके अलावा 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में हैं, जहां सिंचाई सुविधा 25 से 50 प्रतिशत के बीच है। वहीं 128 जिले ऐसे हैं जिन्हें अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण निम्न प्राथमिकता में रखा गया है।
ये सभी जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में फैले हुए हैं।
मानसून में भारी कमी, फसल पर मंडराया खतरा
मौसम विभाग के आकलन के अनुसार भारतीय मौसम विज्ञान विभाग India Meteorological Department ने संकेत दिया है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से काफी कमजोर रह सकता है। अब तक बारिश सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम दर्ज की गई है और 2 जुलाई तक भी इसके कमजोर रहने की संभावना जताई गई है।
इस स्थिति का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
वैज्ञानिक योजना और जिला स्तर पर तैयारियां
सरकार ने बताया कि सभी जिलों के लिए कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा डिस्ट्रीक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान (DACPs) तैयार किए गए हैं। इनमें जलवायु परिस्थितियों, फसल पैटर्न, जल संसाधनों और जोखिम विश्लेषण को ध्यान में रखा गया है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद Indian Council of Agricultural Research और इसके अंतर्गत कार्यरत ICAR-CRIDA ने प्रत्येक जिले के लिए वैकल्पिक फसलें, कम पानी में उगने वाली फसलें और फसल विविधीकरण की रणनीतियां तैयार की हैं।
जल संरक्षण और पेयजल आपूर्ति पर विशेष जोर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत तालाब, जलाशय, नहरें, खेत तालाब, चेक डैम और अस्थायी बांधों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही संवेदनशील जिलों में पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त जल स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा, बुवाई पर सख्त सलाह
राज्यों को सलाह दी गई है कि वे कम अवधि और कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा दें। विशेष रूप से दलहन, मोटे अनाज (श्रीअन्न) और तिलहन फसलों पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुवाई केवल तभी करें जब 75 से 100 मिमी तक बारिश और पर्याप्त मिट्टी में नमी हो, ताकि बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की स्थिति न बने।
बीज, खाद और बीमा की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए बीजों की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर ली गई है और अतिरिक्त एक प्रतिशत बीज स्टॉक उन क्षेत्रों के लिए रखा गया है जहां दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ सकती है।
इसके साथ ही फसल बीमा योजना के तहत कवरेज बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके। Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana को और प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने यह भी कहा है कि किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए Kisan Credit Card योजना के तहत पात्र किसानों को तेजी से कार्ड जारी किए जा रहे हैं।
चारे की कमी से निपटने की तैयारी
कमजोर मानसून की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की कमी की संभावना को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। इसके तहत चारे को सरप्लस क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में भेजने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि पशुपालकों को संकट का सामना न करना पड़े।
सरकार का दावा है कि सभी तैयारियां वैज्ञानिक आधार पर की जा रही हैं और जिला स्तर तक योजनाओं को लागू किया जा रहा है, ताकि कमजोर मानसून या एल नीनो के प्रभाव से कृषि और किसानों की आजीविका को न्यूनतम नुकसान हो।

