नई दिल्ली: नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित तौर पर किए गए बदलाव को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि Election Commission की रिपोर्ट आने के बाद यह देखा जाएगा कि आखिर Form 6 में बदलाव किसने और किस आधार पर किया।
मामला मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ दायर याचिकाओं से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल किए जा रहे Form 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त शर्तों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि Election Commission के online version में ऐसा बदलाव किया गया, जबकि मूल statutory form में कोई संशोधन नहीं हुआ था।
Form 6 में क्या बदलाव किया गया था?
विवाद उस समय सामने आया जब Election Commission के ECINET portal पर उपलब्ध Form 6 में एक नया section दिखाई दिया। इसमें नए मतदाता से उसके माता-पिता की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी कि वे पिछली Special Intensive Revision (SIR) के दौरान electoral roll में शामिल थे या नहीं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह बदलाव statutory Form 6 में निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक नहीं किया गया था। उनका कहना है कि Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना Form 6 में इस तरह की अतिरिक्त शर्त जोड़ना कानूनी रूप से उचित नहीं था।
हालांकि, Election Commission ने बाद में SIR पूरी हो चुके राज्यों में अपने ECINET application portal से यह अतिरिक्त SIR declaration हटा दिया। आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि SIR अवधि के बाहर Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू Form 6 का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मेनका गुरुस्वामी ने Form 6 में किए गए कथित बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में SIR के दौरान Form 6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई थीं। उन्होंने दावा किया कि इन संशोधित Forms 6 को लोगों के बीच प्रसारित किया गया और इसके आधार पर कुछ आवेदकों को नोटिस भी जारी हुए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि Supreme Court ने Form 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि जब Election Commission की रिपोर्ट कोर्ट के सामने आएगी, तब यह भी देखा जाएगा कि आखिर किसने Form 6 में क्या बदलाव किया था।
CJI की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि याचिकाकर्ताओं की ओर से Form 6 में किए गए बदलाव को “unauthorised and illegal” बताया गया है। मामले में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या statutory form में बिना नियमों में संशोधन किए अतिरिक्त शर्तें जोड़ी जा सकती हैं।
याचिका में CEC पर लगाए गए गंभीर आरोप
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने DG-IT के साथ मिलकर जुलाई 2026 में ECINET portal पर Form 6 में डिजिटल बदलाव किया। याचिका के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को Commissioner Sandhu ने इस बदलाव को कथित तौर पर “unauthorised and illegal” बताया था और इसे तत्काल हटाने का निर्देश दिया था।
याचिका में दावा किया गया है कि इसके बावजूद कथित तौर पर संशोधित Form 6 कुछ समय तक portal पर उपलब्ध रहा। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इससे पहली बार मतदान करने वाले युवा और पात्र मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि Registration of Electors Rules, 1960 में किसी विधायी संशोधन के बिना statutory Form 6 में एकतरफा बदलाव नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने इसे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता पंजीकरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के खिलाफ बताया है।
Election Commission ने दी थी Form 6 पर सफाई
Form 6 को लेकर विवाद के बीच Election Commission ने 26 सितंबर को अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा था कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाली अतिरिक्त declaration केवल उसी प्रक्रिया और अवधि तक लागू होगी। आयोग के अनुसार, SIR अवधि खत्म होने के बाद Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित Forms का इस्तेमाल किया जाएगा।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद Form 6 में हुए कथित बदलाव को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। अदालत अब Election Commission की रिपोर्ट का इंतजार करेगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि Form 6 में बदलाव किस स्तर पर हुआ और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी थी।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Form 6 नए मतदाताओं के लिए electoral roll में नाम दर्ज कराने का प्रमुख आवेदन पत्र है। ऐसे में इसमें किसी भी अतिरिक्त शर्त या बदलाव का सीधा असर पहली बार वोट देने वाले पात्र नागरिकों की registration प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
