नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश सरकार ने मानसून के दौरान पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य में सभी प्रकार की खनन (Mining) गतिविधियों पर मौसमी प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध सितंबर तक प्रभावी रहेगा। राज्य सरकार हर वर्ष मानसून के मौसम में यह कदम उठाती है ताकि भारी बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव, भूस्खलन और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
मानसून में हर साल लागू होता है प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश का पहाड़ी क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में मानसून के दौरान खनन गतिविधियों से भूस्खलन, नदियों में गाद बढ़ने और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से राज्य सरकार हर साल बरसात के मौसम में खनन पर पूरी तरह रोक लगाती है।
रात में खनन और परिवहन पर भी सख्त रोक
हिमाचल प्रदेश उद्योग विभाग के नियमों के तहत राज्य में रात के समय खनन और खनिज सामग्री के परिवहन पर भी प्रतिबंध लागू है। सामान्य तौर पर रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि या खनिजों के परिवहन की अनुमति नहीं होती। इसका उद्देश्य अवैध खनन पर रोक लगाना और निगरानी को प्रभावी बनाना है।
अवैध खनन पर सरकार की कड़ी कार्रवाई
राज्य सरकार ने Mineral Policy 2024 के तहत अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नई नीति के अनुसार जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है, अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को जब्त किया जा रहा है और निगरानी मजबूत करने के लिए विशेष Mining Guards की नियुक्ति भी की गई है। सरकार का लक्ष्य राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाना है।
ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों का भी पालन
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुसार, बिना पर्यावरणीय मंजूरी और सरकारी अनुमति के निजी भूमि पर पहाड़ों की कटाई या खनन की अनुमति नहीं है। राज्य सरकार इन निर्देशों का सख्ती से पालन कर रही है ताकि प्राकृतिक संतुलन बना रहे और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
खनन पट्टों के लिए भी तय हैं दूरी के नियम
हिमाचल प्रदेश के Minor Minerals Rules के तहत नगर निगम (Municipal Corporation) की सीमा से 2 किलोमीटर और नगर पंचायत (Nagar Panchayat) की सीमा से 1 किलोमीटर के भीतर सामान्य तौर पर नए खनन पट्टे (Mining Lease) की अनुमति नहीं दी जाती। यह व्यवस्था आबादी वाले क्षेत्रों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
पर्यावरण संरक्षण पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का कहना है कि मानसून के दौरान खनन पर रोक और सख्त नियमों का उद्देश्य केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पर्वतीय पर्यावरण की रक्षा करना भी है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद मिलेगी।

