नई दिल्ली. देश में समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) को नई दिशा देने के लिए 9 जुलाई को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन Letter of Authorisation (LoA) for Sustainable Harnessing of Fisheries in the High Seas का शुभारंभ करेंगे। इसी अवसर पर Odisha Deep Sea Fishing Mission (2026-2036) दस्तावेज भी जारी किया जाएगा, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देना और मछुआरों की आय बढ़ाना है।
मछुआरों को मिलेगा बड़ा लाभ
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, Letter of Authorisation (LoA) मिलने के बाद पात्र भारतीय ध्वज (Indian-Flagged) वाले मछली पकड़ने के जहाज तय नियमों के तहत भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर हाई सी (High Seas) में मछली पकड़ सकेंगे। इससे मछुआरों को अधिक मूल्य वाली समुद्री मछलियों तक पहुंच मिलेगी और उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना है।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन और पारदर्शी
सरकार ने बताया कि LoA प्रणाली पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। इसे ReALCraft Fishing Vessel Registration Portal से जोड़ा गया है, जिससे आवेदन, मंजूरी और निगरानी की प्रक्रिया आसान होगी। इससे मत्स्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा और संचालन अधिक जवाबदेह बनेगा।
फिशरीज कोऑपरेटिव और FFPO को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल के तहत Fisheries Farmer Producer Organisations (FFPOs) और मत्स्य सहकारी समितियों को भी मजबूत किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान कई मत्स्य सहकारी समितियों और मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों को LoA प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे गहरे समुद्र में जिम्मेदार और टिकाऊ मत्स्य पालन कर सकेंगे।
ओडिशा बनेगा Deep Sea Fishing का बड़ा केंद्र
कार्यक्रम में Odisha Deep Sea Fishing Mission (2026-2036) भी लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य आधुनिक मछली पकड़ने के बुनियादी ढांचे का विकास, बेहतर बाजार व्यवस्था, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। इससे ओडिशा को Deep Sea Fishing और Marine Export Hub के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
Blue Economy को मिलेगा नया बल
केंद्र सरकार का मानना है कि यह पहल देश में Blue Economy को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। इससे समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग, मछुआरों की आजीविका में सुधार, समुद्री खाद्य निर्यात में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा।
भारत के पास समुद्री संसाधनों की बड़ी क्षमता
भारत के पास लगभग 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। देश में समुद्री मत्स्य उत्पादन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं और लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 73,890 करोड़ रुपये के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
टिकाऊ मत्स्य पालन पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 में Guidelines for Sustainable Harnessing of Fisheries in the High Seas अधिसूचित की थीं। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य हाई सी में भारतीय जहाजों द्वारा जिम्मेदार, सुरक्षित और टिकाऊ मत्स्य पालन सुनिश्चित करना है। नई LoA व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

