नई दिल्ली: भारत की जनगणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। यह देश की पहली ऐसी जनगणना होगी, जो डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी और डेटा आधारित (data-driven) नीति निर्माण को मजबूत करेगी।
दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग): अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027 में
इस दौरान लोगों की जनसंख्या, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी एकत्र की जाएगी।
जाति डेटा भी होगा शामिल
इस बार की जनगणना में जाति से जुड़ा डेटा भी इकट्ठा किया जाएगा, जिससे सरकार को योजनाएं बनाने में और सटीकता मिलेगी।
डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी
सरकार ने इसके लिए एक Census Management and Monitoring System पोर्टल तैयार किया है, जिससे पूरे प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे पारदर्शिता और सटीकता दोनों बढ़ेंगी।
कितना होगा खर्च
केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना के लिए 11,700 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मंजूर किया है, जो इस बड़े अभ्यास को सफल बनाने में इस्तेमाल होगा।
संदर्भ तिथि तय
जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है। जबकि बर्फीले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पहले पूरी की जाएगी।
क्या होगा फायदा
नीति निर्माण में अधिक सटीकता
योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन
बदलती सामाजिक-आर्थिक जरूरतों की सही पहचान
डिजिटल इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
जनगणना 2027 सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की योजना का आधार बनेगी। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज, पारदर्शी और प्रभावी होगी।
