नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें जीवन में आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking), नैतिक आचरण और निरंतर सीखने की भावना अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता तभी सार्थक है जब उसमें विनम्रता और संवेदनशीलता भी शामिल हो।
असफलता से सीखने का संदेश
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि असफलताओं से घबराने की बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि इंसानियत और सहानुभूति भी जीवन में उतनी ही जरूरी हैं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील
उन्होंने युवाओं से समाज के प्रति जिम्मेदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। साथ ही उन्होंने विविधता का सम्मान करने और समाज के हित में काम करने पर जोर दिया।
सोशल मीडिया और नशे से दूर रहने की सलाह
C. P. Radhakrishnan ने छात्रों को नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल रचनात्मक कार्यों के लिए होना चाहिए।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान
उपराष्ट्रपति ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन का जिक्र करते हुए युवाओं को जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की बात कही।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
उन्होंने महिला स्नातकों की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
कैंसर जागरूकता: युवाओं के लिए जरूरी जानकारी
दीक्षांत समारोह के अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश भी महत्वपूर्ण है।
कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज से इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।
युवाओं को तंबाकू, धूम्रपान और नशे से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये कैंसर के बड़े कारण हैं।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से जोखिम कम किया जा सकता है।
जागरूकता और सही जानकारी ही कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल Haribhau Kisanrao Bagde और उपमुख्यमंत्री Prem Chand Bairwa भी मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट है-शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। युवाओं को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़कर देश और समाज के विकास में योगदान देना चाहिए।
