नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग (EC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बताया है कि कैश, शराब, ड्रग्स और अन्य प्रलोभनों से जुड़ी जब्ती का आंकड़ा 650 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए की जा रही है।
आयोग के मुताबिक, जब्त की गई चीजों में नकदी, शराब, नशीले पदार्थ, कीमती धातुएं और मुफ्त बांटे जाने वाले सामान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा जब्ती हुई?
पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर, तमिलनाडु दूसरे नंबर पर चुनाव आयोग द्वारा जारी राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा जब्ती पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई है। इसके बाद तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी का स्थान है।
राज्यवार जब्ती का आंकड़ा:
पश्चिम बंगाल – 319 करोड़ रुपये
तमिलनाडु – 170 करोड़ रुपये
असम – 97 करोड़ रुपये
केरल – 58 करोड़ रुपये
पुडुचेरी – 7 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों से साफ है कि चुनावी राज्यों में प्रलोभन आधारित चुनावी गतिविधियों पर आयोग ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।
चुनाव आयोग की सख्ती: 5,100 से ज्यादा फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात
शिकायत मिलने पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई का निर्देश
चुनाव आयोग ने बताया कि शिकायतों पर तेजी से एक्शन लेने के लिए 5,100 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं। इन टीमों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी शिकायत पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा, 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें (Static Surveillance Teams) भी बनाई गई हैं, जो मुख्य स्थानों, सीमाओं, संवेदनशील इलाकों और चेकिंग प्वाइंट्स पर अचानक जांच कर रही हैं।
कैसे होती है चुनाव में प्रलोभनों की एंट्री?
नकदी से लेकर शराब और मुफ्त सामान तक पर नजर चुनाव के दौरान कई बार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कैश, शराब, ड्रग्स, सोना-चांदी, घरेलू सामान, गिफ्ट पैकेट और अन्य फ्रीबीज का इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग की यह कार्रवाई इसी तरह के गैरकानूनी चुनावी प्रलोभनों पर रोक लगाने के लिए है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की जब्ती यह संकेत देती है कि आयोग इस बार “फ्री एंड फेयर इलेक्शन” को लेकर ज्यादा सख्त रुख अपनाए हुए है।
आम जनता को परेशान न करने की भी हिदायत
हालांकि, चुनाव आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों और जांच टीमों को यह भी साफ निर्देश दिया है कि जांच और तलाशी के दौरान आम नागरिकों को परेशान या परेशान करने वाला व्यवहार न किया जाए। आयोग ने कहा है कि कानूनी कार्रवाई और निगरानी जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर सामान्य यात्रियों, व्यापारियों या स्थानीय लोगों को अनावश्यक रूप से रोका या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है चुनाव आयोग का संदेश?
“सख्ती भी, संतुलन भी” की रणनीति पर काम चुनाव आयोग का पूरा फोकस इस समय दो बातों पर है: चुनाव को प्रभावित करने वाले अवैध पैसों और प्रलोभनों पर रोक आम लोगों को बिना वजह असुविधा से बचाना यानी आयोग एक तरफ चुनावी गड़बड़ियों पर कड़ी नजर रख रहा है, तो दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के नाम पर आम नागरिकों को दिक्कत न हो।
आगामी विधानसभा चुनाव और उपचुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, चुनाव आयोग की निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ती जा रही हैं। 650 करोड़ रुपये से ज्यादा की जब्ती यह दिखाती है कि इस बार आयोग मतदाताओं को प्रभावित करने की हर कोशिश पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि चुनावी राज्यों में जांच, निगरानी और छापेमारी लगातार जारी है।
