नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता राजनाथ सिंह ने की, जबकि एस जयशंकर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात और भारत की तैयारियों पर जानकारी दी।
सरकार का आश्वासन: स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
बैठक में सरकार ने साफ कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भारत हालात पर सतर्कता और आत्मविश्वास के साथ नजर बनाए हुए है।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत, सप्लाई में नहीं रुकावट
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की प्रस्तुति और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान में बताया गया कि देश में कच्चे तेल, LPG और अन्य जरूरी संसाधनों का पर्याप्त भंडार है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता मजबूत है, जिससे ईंधन और उर्वरक की सप्लाई बिना बाधा जारी है। कई शिपमेंट्स आ चुकी हैं और आने वाले दिनों में और भी आने की उम्मीद है।
कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भारत
सरकार ने बताया कि भारत सभी पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और अपने हितों की रक्षा के लिए सक्रिय कूटनीति अपना रहा है।
ईरान द्वारा सप्लाई रूट दोबारा खोलना एक सकारात्मक संकेत माना गया।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सरकार ने कहा कि फिलहाल भारतीय नागरिकों के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है। विदेशों में भारतीय दूतावास सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर निकासी (evacuation) की पूरी तैयारी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी नजर
श्रीलंका के पास पनडुब्बी गतिविधियों की खबरों पर सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन किसी भी स्थिति से सख्ती से निपटा जाएगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
बैठक में असदुद्दीन ओवैसी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी की बैठक में भागीदारी को लेकर भी अनिश्चितता बनी रही।
कैसे शुरू हुआ संकट
पश्चिम एशिया में यह संकट 28 फरवरी को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति और व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ गई।
पीएम मोदी का पहले ही चेतावनी भरा बयान
इससे पहले नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि इस संकट का असर लंबा चल सकता है और राज्यों को भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है और हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन वैश्विक संकट को देखते हुए सतर्कता और समन्वय जरूरी है।
