नई दिल्ली: आम लोगों की जेब पर 1 अप्रैल से दवाओं का हल्का असर पड़ने वाला है। भारत में लगभग 900 जरूरी दवाओं (Essential Medicines) की कीमतों में करीब 0.65 फीसदी तक बढ़ोतरी होने जा रही है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है।
किन दवाओं के दाम बढ़ेंगे
दाम बढ़ने वाली दवाओं में रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई अहम दवाएं शामिल हैं। इनमें:
पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं)
एंटीबायोटिक्स
एंटी-इन्फेक्टिव दवाएं
क्रॉनिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। यानी यह बदलाव उन दवाओं पर असर डाल सकता है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीज नियमित रूप से करते हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम
NPPA के अनुसार, यह बढ़ोतरी Wholesale Price Index (WPI) यानी थोक मूल्य सूचकांक में हुए बदलाव के आधार पर की जा रही है।
कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए WPI में 0.64956 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके आधार पर दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में यह संशोधन किया गया है।
बिना सरकारी मंजूरी के बढ़ा सकेंगे MRP
NPPA ने साफ किया है कि National List of Essential Medicines (NLEM) में शामिल scheduled formulations के निर्माता अब बिना पूर्व सरकारी मंजूरी के अपनी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में यह तय बढ़ोतरी कर सकेंगे। हालांकि, कंपनियां सीलिंग प्राइस (ceiling price) से ऊपर कीमत नहीं बढ़ा सकेंगी।
क्या होती हैं Scheduled Formulations
Scheduled formulations वे दवाएं होती हैं जो National List of Essential Medicines में शामिल रहती हैं और जिनकी कीमतों पर सरकार का नियंत्रण होता है। इन दवाओं की कीमत NPPA तय करता है, ताकि आम जनता को जरूरी दवाएं सुलभ और किफायती दर पर मिलती रहें।
फार्मा कंपनियों पर बढ़ा लागत का दबाव
यह मूल्य संशोधन ऐसे समय में हुआ है जब दवा कंपनियां कच्चे माल और आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी का सामना कर रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर दबाव बढ़ा है, जिससे दवा निर्माण लागत पर असर पड़ा है।
हाल के वर्षों में सबसे छोटी बढ़ोतरी में से एक
हालांकि, इस बार की कीमत बढ़ोतरी हाल के वर्षों की सबसे मामूली वृद्धि में से एक मानी जा रही है। तुलना करें तो: अप्रैल 2022 में दवाओं की कीमतों में 10.7 फीसदी तक की बड़ी बढ़ोतरी हुई थी
जबकि इस बार यह बढ़ोतरी सिर्फ करीब 0.65 फीसदी है,यानी असर तो पड़ेगा, लेकिन यह झटका बहुत बड़ा नहीं माना जा रहा।
हर साल WPI के आधार पर होती है समीक्षा
NPPA हर साल Drugs Price Control Order (DPCO) के तहत दवाओं की कीमतों की समीक्षा करता है। इस व्यवस्था के तहत कंपनियों को WPI में बदलाव के हिसाब से कीमतें समायोजित करने की अनुमति दी जाती है। इसका मकसद यह है कि जरूरी दवाएं आम जनता की पहुंच में रहें और कंपनियों को लागत बढ़ने पर सीमित राहत भी मिल सके।
आम लोगों पर कितना पड़ेगा असर?
क्योंकि बढ़ोतरी सिर्फ 0.65 फीसदी है, इसलिए मरीजों पर इसका असर बहुत बड़ा नहीं होगा। लेकिन जो लोग लंबे समय तक दवाएं लेते हैं, जैसे कि क्रॉनिक बीमारियों के मरीज, उनके लिए यह बदलाव कुल मासिक खर्च में हल्का इजाफा कर सकता है।
1 अप्रैल से नई कीमतें लागू
सरकार के निर्देश के अनुसार, यह संशोधित कीमतें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगी। यानी इसके बाद मेडिकल स्टोर्स पर मिलने वाली कई जरूरी दवाओं की कीमतों में हल्का बदलाव दिखाई देगा।
