नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके बाद यह संसद से पारित हो गया। इससे पहले लोकसभा ने मंगलवार को विपक्ष के वॉकआउट के बीच वॉइस वोट से इसे पारित किया था।
यह विधेयक ट्रांसजेंडर की कानूनी परिभाषा में बदलाव से जुड़ा है और इसे लेकर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज हो गई है।
क्या है विधेयक में बड़ा बदलाव
इस संशोधन विधेयक के तहत ट्रांसजेंडर की श्रेणी को फिर से परिभाषित किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसमें ‘स्व-धारित लैंगिक पहचान’ (Self-Perceived Gender Identity) से जुड़े प्रावधान को हटा दिया गया है। इसके साथ ही, विधेयक के दायरे से कई सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान समूहों और ट्रांसमास्कुलिन व्यक्तियों को भी बाहर रखा गया है।
यही प्रावधान इस बिल को सबसे ज्यादा चर्चा और विवाद के केंद्र में ला रहा है।
राज्यसभा में सरकार ने क्या कहा
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री Virendra Kumar ने कहा कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय को सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में लाया गया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके खिलाफ भेदभाव रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।
लोकसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बीच पास हुआ था बिल
इससे पहले मंगलवार को जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तब विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया। विरोध के बीच विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया, जिसके बाद विधेयक वॉइस वोट के जरिए पारित कर दिया गया।विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से इस बात पर चिंता जताई जा रही है कि विधेयक में किए गए बदलाव पहचान के अधिकार और समुदाय की विविधता को सीमित कर सकते हैं।
बिल को लेकर क्यों बढ़ा विवाद
इस विधेयक को लेकर सबसे बड़ा विवाद सेल्फ-आइडेंटिफिकेशन यानी व्यक्ति की अपनी लैंगिक पहचान तय करने के अधिकार को लेकर है। अब तक ट्रांसजेंडर अधिकारों की बहस में यह मुद्दा काफी अहम माना जाता रहा है।
आलोचकों का कहना है कि यदि स्व-पहचान के अधिकार को कमजोर किया जाता है, तो इससे समुदाय के कई वर्ग कानूनी और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं।
वहीं सरकार का पक्ष है कि नया ढांचा नीतिगत स्पष्टता और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद करेगा।
सरकार ने गिनाईं ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए पहलें
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, ताकि उन्हें शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक पहचान मिल सके।
केंद्र सरकार का दावा है कि उसका उद्देश्य भेदभाव खत्म करना और समाज में बराबरी का अवसर देना है।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है बहस
विधेयक के संसद से पारित होने के बाद अब इस पर सामाजिक संगठनों, अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है। विशेष रूप से यह बहस इस बात पर केंद्रित रह सकती है कि कानूनी परिभाषा और व्यक्तिगत पहचान के अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
यह विधेयक अब देश में ट्रांसजेंडर अधिकारों की दिशा और दायरे को नए सिरे से प्रभावित कर सकता है।
