नई दिल्ली. Himachal Pradesh में भीषण गर्मी और सूखे मौसम के बीच जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मंगलवार को Solan जिले के क्यारीघाट इलाके में लगी भीषण आग ने इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। आग की लपटें दूर तक दिखाई दीं और पूरे पहाड़ी क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
लकड़ी की दुकानों को भारी नुकसान
आग की चपेट में आने से कई लकड़ी की दुकानें प्रभावित हुईं। स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक आग तेजी से फैली क्योंकि दुकानें लकड़ी की बनी हुई थीं। एक दुकानदार ने बताया कि दुकान में रखे मिक्सर और अन्य सामान पूरी तरह जल गए, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा आग का कारण
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का काम शुरू किया।
दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से टला बड़ा हादसा
फायर विभाग की त्वरित कार्रवाई और स्थानीय लोगों की मदद से आग को तेजी से फैलने से रोक लिया गया। अधिकारियों के अनुसार दो फायर फाइटर्स को मौके पर तैनात किया गया था और समय रहते आग को नियंत्रित कर लिया गया।
हिमाचल और उत्तराखंड में बढ़ रहे जंगलों के आग के मामले
हाल के दिनों में Uttarakhand और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ी हैं। उत्तराखंड में करीब 400 आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वहीं हिमाचल के सोलन, शिमला, मंडी और धर्मपुर जैसे क्षेत्रों में भी कई वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
चीड़ के जंगल बन रहे आग की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले चीड़ के पेड़ आग फैलने की बड़ी वजह बन रहे हैं। गर्मियों में इन पेड़ों से सूखी पत्तियां और सुइयां गिरती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘पिरुल’ कहा जाता है। इनमें मौजूद रेजिन बेहद ज्वलनशील होता है, जिससे छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण लंबे सूखे और बढ़ती गर्मी ने जंगलों की आग की घटनाओं को और गंभीर बना दिया है। इसके अलावा सड़क किनारे कचरा जलाना, कैंप फायर और सूखी वनस्पति भी आग फैलने का बड़ा कारण बन रहे हैं।
सरकार ने शुरू किए रोकथाम के प्रयास
राज्य सरकार ने जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने के लिए कई कदम उठाने शुरू किए हैं। Himachal Pradesh Land Preservation Act के तहत चीड़ की सूखी पत्तियों को हटाने और जंगल प्रबंधन को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
बेहतर वन प्रबंधन को बताया गया समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की नियमित सफाई, चीड़ की सूखी सुइयों को हटाना और जैव विविधता वाले जंगलों का पुनर्स्थापन ही वनाग्नि की घटनाओं को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

