जन्मदिन विशेष : 52 साल की उम्र में पहली बार शिमला आये थे गांधी

शिमला. ब्रिटिश शासनकाल में शिमला के ‘समर कैपिटल’ होने के चलते महात्मा गांधी का यहां से अटूट रिश्ता रहा है. शिमला को न पसंद करते हुए भी महात्मा गांधी ने गोरों को करारा जवाब देने के लिए 52 वर्ष की उम्र से जो यहां आना शुरू किया वह उनके जीवन के अंतिम पड़ाव तक जारी रहा.

गांधी वायसरिगल लॉज में महत्वपूर्ण बैठकों व आजादी के आंदोलन से जनता को जोड़ने के लिए शिमला आते रहे. लगातार दौरों ने उन्हें आखिर यहां की वादियों से प्यार करना भी सिखा दिया. 25 वर्षों में महात्मा गांधी 10 बार शिमला आये. शिमला के इन दौरों ने हिमाचल ही नहींं पूरे देश पर प्रभाव डाला.

21 मई, 1921 को महात्मा गांधी शिमला के पहले दौरे में वायसराय लार्ड विलिंग्टन से मिले. वे इस दौरे में शिमला के ईदगाह में हजारों की संख्या में मौजूद जनता को संबोधित किया.

25 अगस्त, 1931 के दो दिवसीय दौरे का मकसद वायसराय से नमक कर पर वार्ता करना रहा. इसके बाद महात्मा गांधी 4 व 26 सितंबर 1939 को शिमला पहुंचे. द्वितीय विश्व युद्ध के सिलसिले में उन्होंने एक दिन का शिमला दौरा किया.

कब-कब शिमला आए गांधी?
21 मई, 1921
– 13 मई, 1931
– 15 जुलाई, 1931
– 25 अगस्त, 1931
– 4 सितंबर, 1939
– 26 सितंबर, 1939
– 29 जून, 1940
– 27 दिसंबर, 1940
– 23 जून, 1945
– 3 मई, 1946

कहाँ ठहरते थे गांधी

शिमला दौरे के दौरान महात्मा गांधी का पसंदीदा निवास ‘मनोर विला’ हुआ करता था. कपूरथला के महाराजा हरनाम सिंह की बेटी राजकुमारी अमृतकौर का कभी आवास रहे इस विला को वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का गेस्ट हाउस का दर्जा प्राप्त है.
शिमला दौरों के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अधिकांश समय यहीं बिताया है. वर्ष 1935 से 1946 तक वायसराय लॉज में कैबिनेट व कई समझौतों को लेकर हुए बैठकों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए वह इसी भवन से रवाना होते थे. गांधी ‘मनोर विला’ की बालकनी से जनता को संबोधित भी करते थे. आज भी मनोर विला महात्मा गांधी से जुड़ी यादों को संजोए हुए है. अभी भी यहां उस समय गांधी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कुर्सी सहित अन्य फर्नीचर, बिस्तर, पुस्तकें आदि मौजूद हैं.

शांति कुटिया भी गवाह
गांधी के शिमला दौरे और आजादी को लेकर होने वाली गुप्त बैठकों की शान्ति कुटिया भी गवाह है. चक्कर स्थित यह कुटिया अब निजी निवास है. हालांकि मरम्मत के अभाव में भवन की स्थिति नाजुक है. इस कुटिया में एक कमरा ऐसा है जिसके चार दरवाजे चारों दिशा की ओर खुलते हैं. इस कमरे में ही गांधी आजादी की लड़ाई का नेतृत्व कर रहे नेताओं के साथ बैठक किया करते थे. अंग्रेजों से बचने के लिये ये दरवाजे काम आते थे.