नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश के बजट को लेकर पेंशनरों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व मुख्य सलाहकार और पेंशनर्स संघर्ष समिति, शिमला के सह-संयोजक चमन चौहान ने बजट को पेंशनरों के साथ “चुप्पी में लिपटा विश्वासघात” करार देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हजारों बुजुर्ग पेंशनरों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
‘पूरी उम्र सेवा की, अब हक के लिए इंतजार’
चमन चौहान ने कहा कि राज्य की सेवा में पूरा जीवन खपा देने वाले पेंशनरों को अब अपने ही हक के पैसे के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक 60, 70 और 80 वर्ष की उम्र पार कर चुके कई पेंशनर आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन बजट में उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
2016 से 2022 के बीच रिटायर कर्मचारियों के एरियर पर चुप्पी
उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों और पेंशनरों के एरियर का बजट में कोई जिक्र नहीं है। चौहान के अनुसार इस अवधि में रिटायर हुए हजारों कर्मचारियों के करोड़ों रुपये अब भी बकाया हैं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ‘दोहराया गया वादा’
चमन चौहान ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी सरकार ने एरियर देने का ऐलान किया था और इस बार फिर वही बात दोहराई गई है। उनके मुताबिक यह उन कर्मचारियों के साथ मजाक है, जो अब सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और बुढ़ापे में आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
13 फीसदी महंगाई भत्ते के बकाये पर भी कुछ नहीं
उन्होंने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये पर भी सरकार की चुप्पी को बड़ा मुद्दा बताया। चौहान ने कहा कि बजट में इस लंबित देनदारी का कोई जिक्र न होना यह दिखाता है कि सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों को गंभीरता से नहीं ले रही।
‘यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं, नैतिक विफलता भी’
चमन चौहान ने कहा कि पेंशनरों की अनदेखी सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि नैतिक असफलता भी है। उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचे लोग बीमारी, बढ़ती महंगाई और आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं, ऐसे में उनके हक की अनदेखी करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघर्ष तेज करने की चेतावनी
पेंशनर्स संघर्ष समिति ने साफ संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। चौहान ने कहा कि पेंशनर चुप नहीं बैठेंगे और अपने अधिकारों की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे।
बढ़ सकता है सरकार पर दबाव
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर एरियर, डीए बकाया और लंबित भुगतान जैसे मुद्दे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा सवाल बन सकते हैं।
