नई दिल्ली: Supreme Court of India ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते हादसों को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि हाईवे “मौत के गलियारे” नहीं बनने चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि तेज रफ्तार सड़कों पर प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण जान गंवाना अस्वीकार्य है।
केवल 2% सड़कें, लेकिन 30% मौतें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी केवल 2% है, लेकिन इन पर करीब 30% सड़क दुर्घटनाओं में मौतें होती हैं। अदालत ने इसे गंभीर प्रणालीगत खामी बताया।
अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित सफर भी अधिकार
कोर्ट ने कहा कि Article 21 of the Constitution of India के तहत ‘जीवन का अधिकार’ केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित यात्रा का अधिकार भी इसमें शामिल है। इसलिए राज्य की जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करे।
इन हादसों से जुड़ा मामला
यह मामला नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए दो बड़े सड़क हादसों से जुड़ा है, जिनमें कुल 34 लोगों की मौत हुई थी। इसी के आधार पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- हाईवे पर पार्किंग पर सख्त रोक
कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर कहीं भी खड़ा नहीं होगा, केवल निर्धारित पार्किंग (ले-बाय) में ही रुकने की अनुमति होगी।
- 30 दिन में निरीक्षण और रिपोर्ट
हाईवे अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर अतिक्रमण, सुरक्षा और नियमों के पालन पर विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। साथ ही 1033 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय करना होगा।
- अवैध ढाबे और निर्माण हटेंगे
हाईवे के किनारे बने अवैध ढाबे, दुकानें और अन्य संरचनाएं 60 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
- लाइसेंस और NOC पर सख्ती
हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में बिना सुरक्षा मंजूरी के कोई नया लाइसेंस या NOC जारी नहीं होगा। पुराने लाइसेंस की भी समीक्षा होगी।
- हर जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स
प्रत्येक जिले में प्रशासन, पुलिस और हाईवे अधिकारियों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो नियमित निगरानी और कार्रवाई करेगी।
- निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ेगी
हाईवे पर विशेष निगरानी टीम, GPS ट्रैकिंग और लगातार पेट्रोलिंग की व्यवस्था 30 दिनों के भीतर लागू करनी होगी।
- ATMS सिस्टम पूरी तरह लागू
एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (कैमरा, स्पीड डिटेक्टर, मैसेज बोर्ड आदि) 60 दिनों में पूरी तरह सक्रिय करना होगा।
- इमरजेंसी रिस्पॉन्स मजबूत होगा
हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दुर्घटना के बाद तुरंत मदद मिल सके।
- ट्रक ले-बाय और सुविधाएं बढ़ेंगी
ड्राइवरों के आराम के लिए नियमित अंतराल पर ले-बाय, रेस्ट एरिया, भोजन, शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
- ब्लैकस्पॉट की पहचान और सुधार
45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट चिन्हित कर वहां लाइटिंग, स्पीड कैमरा और चेतावनी सिस्टम लगाए जाएंगे।
- राज्यों के बीच समन्वय
अंतर-राज्यीय स्तर पर एक समन्वय तंत्र बनाया जाएगा ताकि नियमों का समान रूप से पालन हो सके।
- 75 दिन में रिपोर्ट दाखिल
सभी एजेंसियों को 75 दिनों के भीतर कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देशभर में हाईवे सुरक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मानव जीवन से बढ़कर कुछ नहीं है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
