नई दिल्ली. कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हालिया I-PAC raids के दौरान पार्टी से जुड़े फाइल्स और चुनावी डेटा (Poll-related data) जब्त किए हैं। वहीं, अदालत ने ED की याचिका पर सुनवाई यह कहते हुए स्थगित कर दी कि जांच एजेंसी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस पर शीर्ष अदालत गुरुवार को सुनवाई करेगी।
ED का साफ इनकार: कोई डेटा जब्त नहीं किया
सुनवाई के दौरान ED ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने TMC का कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया है। एजेंसी ने सवाल उठाया कि जब कोई सामग्री उसके कब्जे में ही नहीं है, तो उसे उसकी सुरक्षा (Safeguarding data) के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
‘डेटा खुद मुख्यमंत्री लेकर गईं’: ED का दावा
ED ने अदालत को बताया कि यदि मामला केवल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का है, तो एजेंसी को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उसने जोर देकर कहा कि संबंधित डेटा ED द्वारा नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) स्वयं अपने साथ लेकर गई थीं।
I-PAC और उसके निदेशक के ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
यह मामला तब सामने आया जब ED ने कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर और उसके निदेशक प्रतीक जैन (Pratik Jain) के आवास पर छापेमारी की थी। इन्हीं रेड्स के सिलसिले में ED और TMC—दोनों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
ED का दावा: TMC से कोई लेना-देना नहीं
प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी दोहराया कि छापेमारी का तृणमूल कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है जांच किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं की जा रही
TMC का आरोप: चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज निशाने पर
TMC का कहना था कि छापेमारी के दौरान पार्टी की आंतरिक फाइलें, कंप्यूटर हार्ड ड्राइव और चुनावी रणनीति से जुड़ा संवेदनशील डिजिटल डेटा जब्त किया गया। इसी आधार पर पार्टी ने कोर्ट से अपने डेटा की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी।
BJP का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि कानूनी जांच को राजनीतिक रंग देना संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर करता है BJP ने चेतावनी दी कि जांच एजेंसियों के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप rule of law को नुकसान पहुंचा सकता है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को ED की याचिका पर सुनवाई करेगा
I-PAC raids और कथित डेटा जब्ती को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है
