नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और विभिन्न मंत्रालय मिलकर स्थिति से निपटने के लिए समन्वय कर रहे हैं।
राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान देते हुए उन्होंने कहा कि हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री खुद इस स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने जनवरी 2026 में ही ईरान जाने से गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। साथ ही वहां रह रहे भारतीयों से भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराने और सावधानी बरतने को कहा गया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में इस संघर्ष और क्षेत्र में फंसे भारतीयों की समस्याओं पर चिंता जताई गई। प्रधानमंत्री मोदी खुद इस स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं और सभी मंत्रियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, ओमान, जॉर्डन, इज़राइल और बहरीन के नेताओं से बातचीत कर सभी से स्थिति को शांत करने की अपील की है।
देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं
विदेश मंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है। साथ ही खाड़ी क्षेत्र भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जहां सालाना लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर समुद्री व्यापार और शिपिंग पर भी पड़ रहा है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य के रूप में काम करते हैं। बढ़ते संघर्ष के कारण क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और खराब हो गई है तथा सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।
डॉ. जयशंकर ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की है। वहीं ईरान में व्यापार के सिलसिले में मौजूद भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता दी गई है।
उन्होंने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित लौट चुके हैं और पश्चिम एशिया से बाकी भारतीयों को भी सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
