नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। पहली बार केंद्र शासित प्रदेश से प्रीमियम Areko Cherries और Scentrose Plums की खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निर्यात की गई है। इस ऐतिहासिक निर्यात के साथ जम्मू-कश्मीर के उच्च गुणवत्ता वाले फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक मांग को भी नई मजबूती मिलेगी।
यह निर्यात कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की पहल और सहयोग से संभव हो पाया है। APEDA ने जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फलों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इस सफल निर्यात को केंद्र शासित प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी भारतीय फलों की मांग
जम्मू-कश्मीर लंबे समय से सेब, चेरी, प्लम और अन्य समशीतोष्ण फलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। अब पहली बार Areko Cherries और Scentrose Plums जैसे प्रीमियम फलों के निर्यात ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय फल गुणवत्ता के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं। UAE जैसे बड़े बाजार में इन फलों की मांग बढ़ने से आने वाले समय में अन्य देशों में भी निर्यात की संभावनाएं मजबूत होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से जम्मू-कश्मीर के किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और कृषि निर्यात को नया आयाम मिलेगा।
2024-25 में 6.37 लाख मीट्रिक टन से अधिक फलों का निर्यात
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान जम्मू-कश्मीर से 6.37 लाख मीट्रिक टन से अधिक फलों का निर्यात किया गया। इस दौरान कुल कारोबार 3,100 करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर का बागवानी क्षेत्र लगातार विकास कर रहा है और वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
सरकार और APEDA का उद्देश्य अब जम्मू-कश्मीर के अन्य उच्च गुणवत्ता वाले कृषि एवं बागवानी उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और भारत का कृषि निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों को छू सके।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीमियम फलों के निर्यात से किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ने से आधुनिक पैकेजिंग, कोल्ड चेन और गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जम्मू-कश्मीर की बागवानी उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह पहली खेप केवल एक निर्यात नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के बागवानी उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खुलने का संकेत है। आने वाले समय में यदि इसी तरह गुणवत्ता और निर्यात पर ध्यान दिया गया, तो प्रदेश के फल दुनिया के कई देशों की बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।

