नई दिल्ली. देश में युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल देने और Vocational Training को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार PM-SETU Scheme के तहत उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। करीब 60 हजार करोड़ रुपये की इस योजना के माध्यम से Industrial Training Institutes यानी ITIs को आधुनिक सुविधाओं, नई तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था से लैस करने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य ITI में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बनाना है, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
ITI के संचालन में उद्योगों की होगी अहम भूमिका
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव Debashree Mukherjee ने Bharat Electricity 2026 के समापन कार्यक्रम में PM-SETU योजना में Industry Participation को लेकर सरकार की रणनीति बताई। उन्होंने कहा कि ITI clusters के प्रबंधन के लिए बनाई जाने वाली Section 8 कंपनियों में Industry Partners की 51 फीसदी हिस्सेदारी होगी। वहीं योजना की अधिकतर वित्तीय जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारें उठाएंगी। उद्योगों की 17 फीसदी हिस्सेदारी को Corporate Social Responsibility यानी CSR के तहत शामिल किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था के जरिए उद्योगों को ITI के पाठ्यक्रम तैयार करने, नई तकनीक अपनाने और युवाओं को जरूरी Skills देने में सीधी भूमिका मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान Vizag cluster में ArcelorMittal की भागीदारी का उदाहरण भी दिया गया, जिसे ITI के बेहतर प्रबंधन और उद्योगों की सक्रिय भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है।
कंपनियां रोजगार के साथ स्किल तैयार करने पर देंगी जोर
सरकार चाहती है कि कंपनियां केवल प्रशिक्षित युवाओं की भर्ती करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी भविष्य की जरूरत के अनुसार Workforce तैयार करने में भी योगदान दें। इसके लिए Industry को Curriculum Development के साथ Trainers और Training Infrastructure में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अलावा देश में Skilling के लिए Centres of Excellence की एक National Registry तैयार की जा रही है। Sector Skill Councils और उद्योगों से जुड़े संस्थानों को National Council for Vocational Education and Training यानी NCVET के तहत Awarding Bodies बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उद्योगों की जरूरत के अनुसार नए पाठ्यक्रमों को तेजी से लागू करने में मदद मिल सकती है।
Apprenticeship Programme को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार Apprenticeship Programmes के विस्तार पर भी काम कर रही है। खासतौर पर Micro, Small and Medium Enterprises यानी MSMEs को Co-funding के माध्यम से Apprenticeship Programme से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र में काम करने का अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा।
Energy Transition से बदल रही Workforce की जरूरत
कार्यक्रम में भारत में हो रहे Energy Transition के कारण रोजगार और कौशल की बदलती जरूरतों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में Digital Skills, Innovation, Problem-Solving और Adaptability जैसी क्षमताएं Workforce के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी। ऐसे में शिक्षा और Skill Development System को भी बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
विश्व बैंक की WePOWER समन्वयक तनुश्री भौमिक ने ऊर्जा परिवर्तन के लिए नवाचार और लोगों की क्षमता बढ़ाने में निवेश की आवश्यकता बताई। SSC NASSCOM की सीईओ अभिलाषा गौड़ ने डिजिटल कौशल के साथ समस्या-समाधान और अनुकूलन क्षमता को लागू करने के लिए योग्यता-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। वहीं एनटीपीसी बिजनेस स्कूल के पावर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ संकाय डॉ अभिनव जिंदल ने प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण और क्षेत्रीय शिक्षण संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
Bharat Electricity 2026 का आयोजन The Energy & Climate Initiatives Society यानी ENCIS ने POWERGEN India और Indian Utility Week 2026 के साथ मिलकर किया। कार्यक्रम का समापन गुरुवार को हुआ।

