नई दिल्ली. भारत की FMCG, Paint और Personal Care कंपनियों के लिए चीनी, Copra और Crude Oil की कीमतें एक बार फिर चिंता का कारण बन रही हैं। अगस्त में ज्यादातर कच्चे माल की कीमतें जुलाई के मुकाबले लगभग स्थिर रहीं, लेकिन सालाना और तिमाही आधार पर कीमतों में बढ़ोतरी अभी भी काफी अधिक है। Nomura की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाली दो तिमाहियों में इन Input Costs का कंपनियों के Margins पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
सितंबर तिमाही यानी दूसरी तिमाही में FMCG कंपनियों के Margins पर दबाव बने रहने की संभावना है। कंपनियों ने जून तिमाही में कई उत्पादों की कीमतें बढ़ाई थीं, जिसका असर अब Sales Growth में दिखाई दे सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक Price Hike की रफ्तार Input Cost Inflation से कम रही है। ऐसे में बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनियों के Profit Margins पर दबाव बना रह सकता है।
सस्ते पुराने स्टॉक का फायदा अब खत्म होने की उम्मीद
पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में Middle East Conflict के कारण कई Raw Materials की कीमतों में तेज उछाल आया था। इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनियों के Margins पर इसका बड़ा असर नहीं दिखा। इसकी एक वजह कंपनियों के पास मौजूद कम कीमत वाले पुराने Inventory Stocks थे। अब यह फायदा धीरे-धीरे खत्म होता दिखाई दे रहा है, जिससे बढ़ी हुई लागत का असर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।
हालांकि, Nomura का अनुमान है कि तीसरी तिमाही से स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है। साल की शुरुआत में कंपनियों की ओर से किए गए Price Hikes का पूरा असर जब बिक्री और कमाई पर दिखाई देने लगेगा, तब Margins को सहारा मिलने की उम्मीद है।
चीनी की कीमत बढ़ने से इन कंपनियों पर दबाव
अगस्त में Sugar Prices में महीने-दर-महीने करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले साल की तुलना में कीमतें लगभग 18 फीसदी ऊपर हैं। सीमित आपूर्ति और Festive Season Demand के कारण चीनी की कीमतों में तेजी आई है। हालांकि सरकार की ओर से Duty-Free Imports जैसे कदमों के बाद कीमतों में ऊंचे स्तर से कुछ नरमी भी देखने को मिली है।
चीनी का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली Britannia, Nestlé, Dabur, ITC और Hindustan Unilever जैसी कंपनियों पर बढ़ी कीमतों का असर पड़ सकता है। Britannia ने लागत के दबाव को देखते हुए सितंबर तिमाही से अतिरिक्त 2 फीसदी Price Hike लागू की है। इससे पहले कंपनी जून तिमाही में भी करीब 1 फीसदी कीमतें बढ़ा चुकी है।
Crude Oil और HDPE की कीमतें भी बढ़ा रहीं चिंता
FMCG और Consumer Companies के लिए Brent Crude और HDPE Prices भी अहम बने हुए हैं। अगस्त में Brent Crude की कीमतों में महीने-दर-महीने करीब 10 फीसदी और HDPE की कीमतों में लगभग 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर HDPE की कीमतों में बढ़ोतरी काफी ज्यादा रही है। इसका असर Packaging Costs पर पड़ सकता है और Paint Companies के लिए भी Input Costs बढ़ सकती हैं।
कंपनियों की ओर से पहले ही Price Hikes किए जाने के बावजूद महंगे Raw Materials का दबाव निकट अवधि में Margins पर बना रह सकता है।
Copra महंगा हुआ, Marico को मिल सकता है फायदा
Coconut Oil के लिए प्रमुख Raw Material Copra की कीमतों में भी अगस्त के दौरान करीब 14 फीसदी की मासिक और 10 फीसदी की तिमाही बढ़ोतरी हुई। इससे निकट भविष्य में Coconut Oil की कीमतों में और कटौती की संभावना कम हो सकती है।
हालांकि Marico के लिए Copra की स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। इसकी कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 33 फीसदी और अपने Peak Level से लगभग 34 फीसदी नीचे हैं। ऐसे में कंपनी के Margins को अभी भी फायदा मिल सकता है और EBITDA Growth मजबूत रहने की उम्मीद है।
Coffee और Tea की कीमतों में नरमी से राहत
हर Raw Material की बढ़ती कीमत कंपनियों के लिए परेशानी नहीं बन रही है। अगस्त में Robusta Coffee की कीमतों में महीने-दर-महीने करीब 4 फीसदी और सालाना आधार पर 8 फीसदी की गिरावट आई। इससे Nestlé और Hindustan Unilever के Margins को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि Tata Consumer के Unbranded Coffee Business को इसका फायदा सीमित मिल सकता है, क्योंकि कम लागत का फायदा ग्राहकों तक Price Reduction के रूप में पहुंचाना पड़ सकता है।
Tea Prices में भी अगस्त के दौरान करीब 7 फीसदी की मासिक गिरावट आई, हालांकि पिछले साल की तुलना में कीमतें अभी भी लगभग 13 फीसदी अधिक हैं। इससे Tata Consumer और Hindustan Unilever के लिए आगे Price Cuts की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि Tea Plucking Season के कारण इसका वास्तविक Margin Impact अभी स्पष्ट नहीं है।
Gold की कीमतों में नरमी से Jewellery कंपनियों को फायदा
Gold Prices में अपने Peak Level से करीब 8 फीसदी की गिरावट और तिमाही आधार पर लगभग 2 फीसदी की कमी आई है। हालांकि सालाना आधार पर सोने की कीमतें अभी भी काफी ऊंची हैं। Nomura के अनुसार, Gold Prices में नरमी Jewellery Retailers के लिए सकारात्मक हो सकती है।
कम कीमतों के कारण ग्राहकों की खरीदारी बढ़ सकती है और Jewellery Companies को ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादा Promotional Spending करने की जरूरत भी कम हो सकती है। इससे Titan जैसी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
ITC और Tata Consumer को लेकर उम्मीद
Nomura ने ITC को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। कंपनी के लिए Leaf Tobacco Prices में सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी की गिरावट Margins के लिए राहत दे सकती है। Tata Consumer को भी Tea Prices में नरमी और Stable HDPE Costs से फायदा मिलने की उम्मीद है, हालांकि उसके Unbranded Coffee Business पर दबाव रह सकता है।
Hindustan Unilever और Dabur को Nomura ने Neutral Rating दी है। HUL ने जून तिमाही में करीब 5 फीसदी Price Hike किया था, जिससे Linear Alkyl Benzene और Crude Derivatives की बढ़ती लागत के बावजूद कंपनी के Margins को सीमित दायरे में बनाए रखने में मदद मिल सकती है। Dabur के Raw Material Basket में फिलहाल कुल मिलाकर बहुत ज्यादा महंगाई नहीं दिखाई दे रही है।
Britannia, Nestlé और Paint Companies पर दबाव
Britannia और Nestlé के लिए बढ़ी हुई Sugar और Packaging Costs चिंता का विषय बनी हुई हैं। वहीं Godrej Consumer Products को Crude Derivatives और Palm Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी ने जून तिमाही में करीब 5 फीसदी Price Hike किया था।
Colgate पर Maize और Mentha Oil की बढ़ती कीमतों का असर पड़ सकता है। Packaging Costs में कंपनी की अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी भी इसके Margins पर दबाव बढ़ा सकती है। United Spirits के लिए Glass Costs बढ़ना Gross Margins को प्रभावित कर सकता है।
Paint Companies के लिए सितंबर तिमाही अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। कंपनियों ने जून तिमाही में करीब 12 फीसदी तक Price Hikes किए थे, लेकिन Input Costs में हुई बढ़ोतरी इन कीमतों से अधिक रही। ऐसे में आने वाली तिमाही में Paint Sector के Margins पर दबाव बने रहने की आशंका है।
Marico, Tata Consumer, Titan और United Spirits पर Nomura का भरोसा
Nomura के मुताबिक मजबूत Brands, बेहतर Product Portfolio और Pricing Power वाली कंपनियां बढ़ती लागत और अस्थिर Demand के माहौल का सामना बेहतर तरीके से कर सकती हैं। Crude Oil और उसके Derivatives पर अधिक निर्भर कंपनियों पर महंगे Inventory का असर ज्यादा पड़ सकता है, जबकि Food Companies के लिए सितंबर तिमाही के बाद लागत का दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है।
Staples Sector में Nomura ने Marico और Tata Consumer Products को अपनी पसंदीदा कंपनियों में रखा है और दोनों को Buy Rating दी है। वहीं Consumer Discretionary Segment में Titan और United Spirits को भी Buy Rating के साथ Top Picks बताया गया है।

