नई दिल्ली. ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI Merchant Payments पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया। यह मामला केंद्र सरकार की ओर से UPI के कुछ बड़े व्यापारी लेन-देन पर MDR लागू करने के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका से जुड़ा है।
सरकार ने कहा- 96% मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर असर नहीं
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश Additional Solicitor General एन. वेंकटरमण ने कहा कि UPI इस्तेमाल करने वाले करीब 96 प्रतिशत लोग इस नए शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। केंद्र का कहना है कि MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant यानी P2M Transactions पर लागू होगा।
सरकार के अनुसार, ₹2,000 तक के Merchant Payments और तय Zero-MDR श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर शुल्क नहीं लगेगा।
याचिकाकर्ता ने मांगी थी नए MDR पर रोक
अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका में केंद्र के नए MDR Framework को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि जब तक केंद्र का जवाब नहीं आ जाता, तब तक नई MDR व्यवस्था पर रोक लगाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस स्तर पर Stay देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को कानूनी से ज्यादा तकनीकी प्रकृति का मुद्दा बताया।
15 अक्टूबर से लागू होगा 0.4% MDR
केंद्र के नए Framework के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के निर्धारित Person-to-Merchant UPI Transactions पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति Transaction तय की गई है।
हालांकि, यह शुल्क सभी UPI Transactions पर लागू नहीं होगा। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI Payments पूरी तरह Free रहेंगे, चाहे ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो।
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR
Railways, Telecom, Insurance, Fuel और Agricultural Inputs जैसे Essential और Thin-Margin Sectors में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित UPI Merchant Transactions पर 0.4% की जगह ₹5 प्रति Transaction का Flat MDR तय किया गया है।
वहीं Mutual Funds, Securities, Stockbrokers और Dealers से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति Transaction होगी।
क्या ग्राहकों से वसूला जाएगा MDR?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR सीधे UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इस लागत को ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI App Providers को Platform Fee या किसी Hidden Charge को लगाने से भी स्पष्ट रूप से रोका गया है।
इसका मतलब है कि नए Framework के तहत निर्धारित MDR Merchant-side charge है। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर याचिका में अन्य कानूनी और तकनीकी सवाल उठाए गए हैं, जिन पर मामले की आगे की सुनवाई में विचार हो सकता है।
P2P UPI Payment रहेगा पूरी तरह Free
सरकार के मुताबिक Person-to-Person यानी P2P UPI Transactions पर नए Framework का कोई असर नहीं पड़ेगा। ये भुगतान किसी भी रकम के लिए Free रहेंगे। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, P2P Transactions UPI के कुल Transaction Volume का करीब 37 प्रतिशत और Transaction Value का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं। नए नियमों का मुख्य असर निर्धारित बड़े Merchant Payments पर होगा, जबकि छोटे मूल्य के भुगतान और Zero-MDR Framework में शामिल लेन-देन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।

