नई दिल्ली. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया की पहली Genome Edited Rice Varieties विकसित की हैं। इन नई धान किस्मों का नाम DRR Dhan 100 (Kamala) और DST Rice 1 रखा गया है। इनका उद्देश्य धान उत्पादन बढ़ाना, बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराना और किसानों को कम अवधि में अधिक लाभ दिलाना है।
यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नई किस्में भविष्य में धान उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
क्या है Genome Editing Technology?
Genome Editing आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें पौधों के जीन में सटीक बदलाव कर उनकी उपयोगी विशेषताओं को बेहतर बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में बाहरी जीन जोड़ने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि मौजूदा जीन संरचना में सुधार किया जाता है।
इस तकनीक के माध्यम से फसलों की पैदावार, गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता बढ़ाई जा सकती है।
DRR Dhan 100 (Kamala) और DST Rice 1 की प्रमुख विशेषताएं
- अधिक उत्पादन क्षमता
नई Rice Varieties को इस तरह विकसित किया गया है कि किसान एक ही खेत से पहले की तुलना में अधिक उपज प्राप्त कर सकें। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।
- बेहतर अनाज गुणवत्ता
इन किस्मों के दानों की गुणवत्ता बेहतर बताई जा रही है। इससे चावल की मिलिंग क्वालिटी और बाजार मूल्य दोनों में सुधार हो सकता है। बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपभोक्ताओं के लिए भी लाभदायक साबित होगा।
- कम अवधि में तैयार होने वाली फसल
नई किस्मों की एक बड़ी खासियत यह है कि ये अपेक्षाकृत कम समय में तैयार हो जाती हैं। इससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है और खेती की उत्पादकता बढ़ सकती है।
- बेहतर Cooking Quality
ICAR के अनुसार इन किस्मों से प्राप्त चावल की बनावट, स्वाद और पकाने की गुणवत्ता भी बेहतर है। इससे घरेलू उपयोग और व्यावसायिक बाजार दोनों में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है।
धान किसानों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत दुनिया के प्रमुख धान उत्पादक देशों में शामिल है और करोड़ों किसान Paddy Cultivation पर निर्भर हैं। ऐसे समय में जब खेती बढ़ती लागत, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, नई तकनीक आधारित किस्में किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई हैं।
इन किस्मों की मदद से कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकेगा, जिससे खेती की लागत और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर कृषि को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि Genome Edited Rice भविष्य की कृषि जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता वाली किस्मों के विकास से देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
ICAR का यह कदम भारत को आधुनिक कृषि अनुसंधान और उन्नत बीज विकास के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

