नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर तीखे मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोल्हापुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि अब शिवसेना में कोई गुट नहीं बचा है और “अब केवल एक ही शिवसेना है, जिसका नेतृत्व Eknath Shinde कर रहे हैं।”
उनका यह बयान उस समय आया है जब उद्धव ठाकरे गुट में बड़ी राजनीतिक हलचल और टूट की स्थिति देखी जा रही है। छह लोकसभा सांसदों के अलग रुख अपनाने से पार्टी नेतृत्व पर संकट और गहरा गया है।
शाह का बयान और महाराष्ट्र की सियासी पृष्ठभूमि
कोल्हापुर की जनसभा में अमित शाह ने कहा कि पहले लोगों को “शिवसेना-शिंदे गुट” कहना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और शिवसेना की पहचान एक ही नेतृत्व के तहत स्थापित हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विजन के तहत ऐतिहासिक मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है।
शाह के इस बयान को महाराष्ट्र में चल रही शिवसेना की आंतरिक खींचतान और सत्ता समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उद्धव गुट में बगावत, 6 सांसदों की अनुपस्थिति से बढ़ा संकट
लोकसभा में उद्धव ठाकरे की Shiv Sena (UBT) को बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी के 9 में से 6 सांसद एक महत्वपूर्ण बैठक से अनुपस्थित रहे। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर अलग समूह बनाने की इच्छा भी जताई है।
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि ये सांसद जल्द ही शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं, जिससे केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए को भी राजनीतिक मजबूती मिल सकती है।
पार्टी का सख्त रुख, दलबदल विरोधी कानून की चेतावनी
स्थिति बिगड़ने के बाद शिवसेना (UBT) ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने सांसदों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है।
नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं दिया गया तो माना जाएगा कि सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके बाद उनके खिलाफ संविधान के दसवें अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में खुला पार्टी में विभाजन
नई दिल्ली में हुई पार्टी बैठक में यह विभाजन खुलकर सामने आया। 9 सांसदों में से केवल तीन—अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे—ही बैठक में शामिल हुए, जबकि बाकी छह सांसद अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति ने पार्टी नेतृत्व को गंभीर राजनीतिक संकट में डाल दिया है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ और बढ़ती राजनीतिक हलचल
राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को ‘ऑपरेशन टाइगर’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत शिवसेना (UBT) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता संतुलन और अधिक बदल सकता है।
राजनीतिक टकराव अपने चरम पर
शिवसेना के दोनों गुटों के बीच जारी यह टकराव अब खुली राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। एक ओर उद्धव ठाकरे अपने सांसदों को “गद्दार” कहकर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना के रूप में स्थापित करने में जुटा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति पैदा कर दी है।

