नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अपराधों और आतंकी फंडिंग के खिलाफ चल रही लड़ाई में भारत को बड़ी सफलता मिली है। वरिष्ठ भारतीय नौकरशाह Vivek Aggarwal को 2026-27 कार्यकाल के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष चुना गया है। वह इस पद पर Giles Thomson का स्थान लेंगे। FATF की पूर्ण बैठक (Plenary) में यह निर्णय लिया गया, जिसे भारत की वैश्विक कूटनीतिक और वित्तीय नीति के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्यरत विवेक अग्रवाल इससे पहले FATF में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ भारत की रणनीति को मजबूती से प्रस्तुत करने में अहम भूमिका निभाई है।
FATF में बढ़ा भारत का प्रभाव
FATF दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी संस्था मानी जाती है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के लिए होने वाले वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रखती है। संस्था वैश्विक मानक तय करती है और सदस्य देशों के वित्तीय ढांचे का मूल्यांकन करती है।
भारत वर्ष 2010 से FATF का सदस्य है और पिछले कुछ वर्षों में संगठन के भीतर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है। विवेक अग्रवाल की नियुक्ति को इसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FATF के उपाध्यक्ष पद पर भारतीय अधिकारी की नियुक्ति से वैश्विक वित्तीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भारत की आवाज और अधिक प्रभावशाली होगी।
विदेश मंत्रालय ने बताया बड़ी उपलब्धि
भारत सरकार ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे देश की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि यह नियुक्ति आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि FATF में भारत के पूर्व प्रतिनिधिमंडल प्रमुख और FIU-IND के पूर्व निदेशक के रूप में विवेक अग्रवाल का व्यापक अनुभव संस्था के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनकी नियुक्ति वैश्विक वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
FATF की बैठक में कई अहम फैसले
17 से 19 जून तक आयोजित FATF प्लेनरी बैठक में दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान Bosnia and Herzegovina और Iraq को बढ़ी हुई निगरानी (Increased Monitoring) के दायरे में रखा गया। वहीं Algeria और Namibia को अपने निर्धारित सुधार कार्यक्रम पूरे करने के बाद FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया।
इन फैसलों को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
FATF नेतृत्व में भी हुआ बदलाव
बैठक में FATF के अगले अध्यक्ष के रूप में गाइल्स थॉमसन की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। वह मौजूदा अध्यक्ष Elisa de Anda Madrazo का स्थान लेंगे।
FATF के शीर्ष नेतृत्व में हुए इन बदलावों को आने वाले वर्षों में वैश्विक वित्तीय अपराधों के खिलाफ रणनीति तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
विशेषज्ञों के अनुसार FATF में उपाध्यक्ष पद हासिल करना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती विश्वसनीयता और प्रभाव का संकेत भी है। हाल के वर्षों में भारत लगातार आतंकवाद के वित्तपोषण, हवाला नेटवर्क, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की वकालत करता रहा है।
ऐसे में विवेक अग्रवाल की नियुक्ति भारत को वैश्विक वित्तीय नीतियों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगी। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा और वित्तीय अपराधों के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में भारत की भागीदारी और मजबूत होगी।
भारत के लिए यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब दुनिया डिजिटल वित्तीय लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी और सीमा पार होने वाले अवैध वित्तीय नेटवर्क जैसी नई चुनौतियों का सामना कर रही है। FATF में भारतीय नेतृत्व की मौजूदगी इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बना सकती है।

