नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियां योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगी। नई पात्रता शर्तों के अनुसार केवल 21 से 59 वर्ष आयु की महिलाएं ही हर महीने मिलने वाली 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेंगी।
राज्य सरकार का कहना है कि योजना को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है। हालांकि इस फैसले के बाद उन हजारों युवतियों को निराशा हाथ लगी है जो पहले इस योजना के दायरे में आती थीं।
क्या है इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
अब कौन महिलाएं होंगी पात्र?
सरकार द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अब केवल 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं ही योजना का लाभ लेने के लिए पात्र मानी जाएंगी।
पहले 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी युवतियां भी इस योजना के तहत आवेदन कर सकती थीं, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद 18, 19 और 20 वर्ष की महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है।
आय सीमा भी तय
योजना का लाभ लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। सरकार का मानना है कि आय सीमा तय करने से वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा।
आवेदन करने वाली महिला को आय प्रमाण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे ताकि पात्रता की जांच की जा सके।
किन महिलाओं को नहीं मिलेगा योजना का लाभ?
सरकार ने कुछ श्रेणियों को योजना से बाहर रखा है। यदि किसी महिला का संबंध इन वर्गों से है तो वह योजना के लिए पात्र नहीं होगी।
केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी और पेंशनधारक इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा अनुबंध, आउटसोर्स या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को भी इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं आयकरदाता और जीएसटी में पंजीकृत व्यक्तियों को भी पात्रता सूची से बाहर रखा गया है।
सरकार ने क्यों किया बदलाव?
राज्य सरकार का तर्क है कि योजना के लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी, जिससे वित्तीय बोझ में वृद्धि हो रही थी। ऐसे में पात्रता मानदंडों को अधिक स्पष्ट और केंद्रित बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
सरकार का कहना है कि संशोधित नियमों से सहायता राशि उन महिलाओं तक पहुंच सकेगी जिन्हें वास्तव में आर्थिक सहयोग की जरूरत है।
महिलाओं में मिश्रित प्रतिक्रिया
योजना में किए गए बदलाव को लेकर महिलाओं की प्रतिक्रिया मिश्रित देखने को मिल रही है। कई महिलाओं ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि सीमित संसाधनों का उपयोग जरूरतमंद लोगों के लिए होना चाहिए।
वहीं 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों और उनके परिवारों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों के दौरान यह आर्थिक सहायता उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकती थी।
योजना का उद्देश्य रहेगा बरकरार
हालांकि पात्रता नियमों में बदलाव किया गया है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का उद्देश्य पहले की तरह जारी रहेगा। राज्य सरकार का दावा है कि योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है।
इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना में किए गए नए बदलावों के बाद अब केवल 21 से 59 वर्ष आयु की महिलाएं ही हर महीने 1500 रुपये की सहायता प्राप्त कर सकेंगी। आय सीमा, रोजगार की स्थिति और कर भुगतान से जुड़े नियमों को भी सख्ती से लागू किया जाएगा। ऐसे में योजना का लाभ लेने की इच्छुक महिलाओं को आवेदन करने से पहले नई पात्रता शर्तों की पूरी जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए।

