नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून को भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं। वह लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने वाले नेता बन जाएंगे। इस उपलब्धि के साथ वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे।
लगातार 4,399 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के बाद मोदी का नाम स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होगा। नेहरू ने 1952 में पहली बार आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला था और उनका लगातार कार्यकाल अब तक सबसे लंबा माना जाता था।
12 वर्षों में बदली भारतीय राजनीति की दिशा
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने हाल ही में अपने 12 वर्ष पूरे किए हैं। इस दौरान देश की राजनीति, शासन व्यवस्था और विकास की प्राथमिकताओं में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
मोदी सरकार ने गरीब कल्याण, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल सेवाओं के प्रसार और सामाजिक योजनाओं को अपनी नीतियों का केंद्र बनाया। सरकार का दावा है कि विकास की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में लगातार काम किया गया है।
कई दशकों पुराने मुद्दों पर लिए गए बड़े फैसले
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी के कार्यकाल में कई ऐसे मुद्दों पर निर्णय लिए गए, जो लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे थे। इनमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद पर नियंत्रण और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान जैसे कदम शामिल हैं।
इन फैसलों ने भारतीय राजनीति के विमर्श को नई दिशा दी और देश की राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव लाया।
‘सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बदलाव से याद किए जाएंगे मोदी’
पूर्व राष्ट्रपति प्रेस सचिव अजय सिंह का मानना है कि किसी नेता की विरासत केवल रिकॉर्ड या आंकड़ों से तय नहीं होती। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय राजनीति की शैली और सोच में व्यापक परिवर्तन लाने वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मोदी के कार्यकाल में कई ऐसे राजनीतिक और वैचारिक बदलाव हुए, जिन्होंने दशकों से चली आ रही स्थापित धारणाओं को चुनौती दी।
‘भारत के दूसरे गणराज्य के प्रमुख शिल्पकार’
राजनीतिक वैज्ञानिक Ashwani Kumar का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र में एक नई राजनीतिक संस्कृति को स्थापित करने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, मोदी केवल एक निर्वाचित नेता नहीं बल्कि ऐसे जननेता के रूप में उभरे हैं जिन्होंने राष्ट्रीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत और विकास को एक साझा राजनीतिक दृष्टि से जोड़ने की कोशिश की।
उन्होंने मोदी को उस नेतृत्व का प्रतिनिधि बताया जो शासन को केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की परियोजना के रूप में देखता है।
नेहरू से तुलना पर जारी बहस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अलग-अलग दौर के प्रधानमंत्रियों की सीधी तुलना करना आसान नहीं है, क्योंकि हर नेता अपने समय की चुनौतियों और परिस्थितियों के अनुरूप काम करता है। फिर भी यह तथ्य महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि मोदी ने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
भारतीय राजनीति के एक नए युग का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी का 4,399 दिनों का यह सफर केवल एक रिकॉर्ड नहीं बल्कि भारतीय राजनीति में आए व्यापक बदलावों का भी प्रतीक माना जा रहा है। पिछले एक दशक में देश ने जिस राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन को देखा है, उसने भारतीय राजनीति को पहले की तुलना में एक अलग दिशा और पहचान दी है।
इतिहास भविष्य में इस दौर का मूल्यांकन किस रूप में करेगा, यह समय तय करेगा, लेकिन इतना निश्चित है कि प्रधानमंत्री मोदी का नाम स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज हो गया है।

