नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र 2026 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार फिलहाल One Nation, One Election (ONOE) विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी में नहीं है। हालांकि, Women’s Reservation Bill और Delimitation Bill को लेकर सरकार की रणनीति पर लगातार चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि यदि ये दोनों विधेयक सदन में लाए जाते हैं तो विपक्ष के कई सांसद सरकार का समर्थन कर सकते हैं, जिससे कांग्रेस अपेक्षाकृत अलग-थलग पड़ सकती है।
सरकार का फोकस फिलहाल लंबित विधेयकों पर
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की पहली प्राथमिकता उन अध्यादेशों को कानून का रूप देना है जो अभी लंबित हैं। इनमें सबसे प्रमुख Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 है। इस विधेयक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की अधिकतम स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करना है। सरकार चाहती है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान इन विधेयकों को प्राथमिकता के आधार पर पारित कराया जाए।
One Nation, One Election पर अभी नहीं बनेगी बात
One Nation, One Election का प्रस्ताव पिछले वर्ष संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था, लेकिन बाद में इसे भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली Joint Parliamentary Committee (JPC) को भेज दिया गया। समिति का कार्यकाल अब 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार एक देश, एक चुनाव की वकालत कर चुके हैं। उनका कहना है कि इससे चुनावों पर होने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस विधेयक को जल्दबाजी में लाना चाहती है और व्यापक राजनीतिक सहमति के बिना इसे पारित कराना संभव नहीं होगा।
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी कहा कि विपक्ष से चर्चा किए बिना इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता और पहले सरकार को अपना पूरा प्रस्ताव स्पष्ट करना चाहिए।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर जारी है सियासी बहस
Constitution (131st Amendment) Bill, 2026, जो महिला आरक्षण से जुड़ा है, पिछले संसद सत्र में लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया था, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी।
विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण का विरोध नहीं करता, लेकिन Delimitation (परिसीमन) की प्रक्रिया को लेकर उसकी गंभीर आपत्तियां हैं। विपक्षी दलों का तर्क है कि नई परिसीमन व्यवस्था से दक्षिण भारत के राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। वहीं, केंद्र सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि परिसीमन के कारण किसी भी राज्य, विशेषकर दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे इस बार संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकते हैं।

