नई दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम यानी DILRMP 3.0 की Operational Guidelines लॉन्च कर दी हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक हाइब्रिड कार्यक्रम के दौरान इन दिशा-निर्देशों को औपचारिक रूप से जारी किया गया। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य देश में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और लोगों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
ग्रामीणों और किसानों के लिए आसान होगी जमीन से जुड़ी प्रक्रिया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि DILRMP 3.0 ग्रामीण नागरिकों, किसानों और संपत्ति मालिकों के लिए Ease of Living बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं है, बल्कि इसका संबंध परिवार और भावनात्मक पहचान से भी जुड़ा होता है। इसलिए जमीन से जुड़े दस्तावेजों का सही और आसानी से उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
मंत्री के अनुसार, DILRMP 3.0 सिर्फ जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अलग-अलग व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़कर एकीकृत सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इससे किसानों के लिए संस्थागत ऋण लेना आसान हो सकता है और लोगों को जमीन से जुड़े काम के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
सिर्फ डिजिटाइजेशन नहीं, पूरी व्यवस्था को जोड़ने की तैयारी
DILRMP 3.0 के तहत सरकार पुराने और अलग-अलग सिस्टम को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करेगी। इसका उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे और अन्य संबंधित जानकारी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, इस व्यवस्था से जमीन के रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी। डिजिटल सिस्टम के बेहतर एकीकरण से जमीन से जुड़े प्रशासनिक कामों को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
Georeferenced Maps पर विशेष जोर
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि DILRMP 3.0 के जरिए जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी पुरानी समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें Spatial Accuracy, Georeferenced Maps और अलग-अलग विभागों के बीच सहज Interoperability को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसका मतलब है कि जमीन के रिकॉर्ड और नक्शों को वास्तविक भौगोलिक स्थिति से अधिक सटीक तरीके से जोड़ा जाएगा। साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों के सिस्टम के बीच डेटा साझा करने और काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश होगी।
Land Administration के लिए बनेगा Digital Public Infrastructure
भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि DILRMP 3.0 देश में भूमि प्रशासन के लिए एक Integrated Digital Public Infrastructure तैयार करने की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड और सेवाओं को एक डिजिटल ढांचे के तहत लाना है। इससे भूमि प्रशासन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिल सकती है।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा कार्यक्रम
मंत्रालय के अनुसार DILRMP 3.0 को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय फंडिंग की व्यवस्था होगी।
इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और फंड जारी करने की प्रक्रिया प्रदर्शन से जोड़ी जाएगी। इसके लिए Public Financial Management System (PFMS) के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन किया जाएगा।
किसानों और जमीन मालिकों को मिल सकती है बड़ी राहत
DILRMP 3.0 का सबसे बड़ा उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक, डिजिटल और आसानी से उपलब्ध बनाना है। इससे किसानों और संपत्ति मालिकों को जमीन के दस्तावेज हासिल करने, उनका सत्यापन कराने और संबंधित सरकारी सेवाओं तक पहुंच बनाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था से जमीन प्रशासन में डिजिटल एकीकरण बढ़ेगा और लोगों को सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही जमीन के रिकॉर्ड की गुणवत्ता और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने में भी यह कार्यक्रम अहम भूमिका निभा सकता है।
