नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि उनकी बातचीत का मुख्य विषय युवाओं की शक्ति का विकास और उसके जरिए एक मजबूत व सक्षम भारत का निर्माण था। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने वर्ष 1993 में हुई इस मुलाकात से जुड़े कई प्रसंग साझा किए।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद को अमेरिका के शिकागो में आयोजित होने वाले विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। स्वामी चिन्मयानंद ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया था और अमेरिका जाकर लोगों को इस आयोजन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित भी किया था।
यह तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्ष 1951 में स्थापित चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के प्रसार में उसके योगदान को रेखांकित करना है।
1993 में हुई थी स्वामी चिन्मयानंद से आखिरी मुलाकात
पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 1993 में फरवरी या मार्च के आसपास उनकी स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक गुरु को शिकागो में होने वाले विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।
यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी आयोजित किया जा रहा था। स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपना प्रसिद्ध संबोधन दिया था।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, स्वामी चिन्मयानंद ने उनका निमंत्रण स्वीकार किया और अमेरिका पहुंचकर इस आयोजन का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने लोगों को भी समारोह में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, आयोजन से कुछ सप्ताह पहले ही 3 अगस्त 1993 को अमेरिका के सैन डिएगो में स्वामी चिन्मयानंद का निधन हो गया। पीएम मोदी ने कहा कि जब 11 सितंबर को शिकागो में विश्व धर्म संसद का आयोजन हुआ, तब वह भी वहां मौजूद थे। उस समय सभी को स्वामी चिन्मयानंद की अनुपस्थिति महसूस हुई।
‘युवाशक्ति का विकास ही मजबूत भारत की नींव’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई आखिरी मुलाकात के दौरान उनकी एक गहरी और महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी। इस चर्चा का केंद्र युवाओं की क्षमता का विकास और उसके माध्यम से देश को मजबूत बनाना था।
पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें आज भी उस बातचीत के विचार याद हैं। उनके मुताबिक, स्वामी चिन्मयानंद के साथ चर्चा का मुख्य विषय युवाशक्ति का विकास और उसके जरिए एक सशक्त व सक्षम भारत का निर्माण था।
प्रधानमंत्री ने अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के कुछ वर्षों बाद लोगों ने उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया।
उन्होंने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति हमेशा उनके प्रयासों और नीतियों के केंद्र में रही है।
‘चिन्मय मिशन केवल संगठन नहीं, एक आध्यात्मिक दर्शन है’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक दर्शन और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद जैसे संत ने की थी।
पीएम मोदी ने मिशन की लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी पहचान उसके संकल्प और आध्यात्मिक विचारों से बनी है। उन्होंने ‘चिन्मय’ की अवधारणा को अमरता और शाश्वतता से जोड़ते हुए इसके स्थायी महत्व पर प्रकाश डाला।
चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी। बीते 75 वर्षों में इसने भारत की आध्यात्मिक शिक्षाओं और सांस्कृतिक विचारों को देश-विदेश तक पहुंचाने का काम किया है।
भारत की सांस्कृतिक जड़ों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को देश की पहचान का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत जड़ें ही उसकी संस्कृति और अस्तित्व की नींव हैं।
पीएम मोदी ने सम्मेलन में शामिल युवाओं के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत युवाओं ने करीब 300 दिनों में लगभग 40,000 किलोमीटर की यात्रा की और एक लाख से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके प्रयासों और नीतियों के केंद्र में देश के युवा लगातार रहे हैं। उनके मुताबिक, युवाओं की भागीदारी और उनकी क्षमता का विकास भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
23 से 25 अक्टूबर तक चल रहा चिन्मय अमृत महोत्सव
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन के माध्यम से चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा, उसकी आध्यात्मिक शिक्षाओं और भारतीय संस्कृति के प्रसार में उसके योगदान को सामने लाया जा रहा है।
सम्मेलन में युवाओं की भूमिका, आध्यात्मिक विचारों और भारत की सांस्कृतिक विरासत जैसे विषयों पर जोर दिया जा रहा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्वामी चिन्मयानंद के विचारों को याद करते हुए युवाशक्ति को देश के विकास और एक मजबूत भारत के निर्माण से जोड़ा।
