नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय सरकार के सचिवों के साथ तीसरी हाई-लेवल मीटिंग की। 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में पीएम मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों से मौजूदा घंटों तक सीमित रहने के बजाय लॉन्ग-टर्म विजन के साथ काम करने और आने वाले दशकों के भारत की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करने का आह्वान किया। बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विदेश मामले और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।
मौजूदा समस्याओं से आगे सोचने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की सोच केवल आज की समस्याएं, आंकड़े और तत्काल घंटों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को यह विचार करना चाहिए कि आज तैयार की जा रही नीतियां और सिस्टम आने वाले वर्षों में देश के विकास को किस तरह प्रभावित करेंगे।
पीएम मोदी ने फ्यूचर-रेडी इंडिया के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया, जो मौजूदा घंटों और नई उंगलियों का सामना करने में सक्षम हो।
सरकारी गतिविधियों के बीच खत्म हों ‘साइलो’
बैठक में प्रधानमंत्री ने सरकारी विभागों में साइलो वर्किंग की संस्कृति को खत्म करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जनगणना के बीच अलग-अलग काम करने की प्रवृत्ति केवल संगठनात्मक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संस्थागत मानसिकता से भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने अधिकारियों से अपने विभाग की जनगणना की पूरी मालिकी लेने और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने का आग्रह किया। पीएम ने संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को एक-दूसरे से बेहतर समन्वय के साथ काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने COVID-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि जटिल परिस्थितियों में विभिन्न सरकारी जनगणना के बीच बेहतर समन्वय से प्रभावी तरीकों से जबड़े का सामना किया गया।
भारत के भविष्य के लिए डेटा है राष्ट्रीय संपत्ति
बैठक में डेटा गवर्नेंस भी प्रमुख मुद्दा रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने डेटा को देश का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए कहा कि सरकार इसके संग्रह, सुरक्षा और प्रबंधन पर काफी संसाधन खर्च करती है, लेकिन अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण इसकी पूरी क्षमता इस्तेमाल नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारी जनगणना में डेटा को अलग-अलग सिस्टम और संस्थाओं के अनुसार मैनेज किया जाता है। ऐसे में ज़रूरत है कि गवर्नमेंट डेटा प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से बातचीत कर सकें।
बेहतर डेटा इंटीग्रेशन से पॉलिसीमेकिंग को ज़्यादा असरदार बनाया जा सकता है और सरकार के पास पहले से मौजूद जानकारी का ज़्यादा इस्तेमाल किया जा सकता है।
AI का इस्तेमाल बढ़ाया, लेकिन ह्यूमन जजमेंट भी ज़रूरी
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बेहतर और इनोवेटिव इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल गवर्नेंस और पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन महत्वपूर्ण गलतियों में ह्यूमन इंटरवेंशन और ह्यूमन जजमेंट की भूमिका बनी रहनी चाहिए।
अधिकारियों को गवर्नेंस में AI के क्रिएटिव एप्लीकेशन तलाशने और टेक्नोलॉजी को ह्यूमन एक्सपर्टाइज़ के साथ मिलकर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
स्टूडेंट्स और यंग माइंड्स से जुड़ी सरकार
PM मोदी ने सरकारी डिपार्टमेंट्स, यूनिवर्सिटीज़ और युवाओं के बीच बेहतर बातचीत की ज़रूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स और यंग माइंड्स के साथ ज़्यादा बातचीत से पॉलिसीमेकिंग में नए आइडियाज़ और फ्रेश पर्सपेक्टिव्स आ सकते हैं।
युवा पीढ़ी के विचार कई बार पारंपरिक सोच को चुनौतियां देते हैं और इससे पॉलिसी बनाने में नए अप्रोच विकसित किए जा सकते हैं।
डिफेंस इंडस्ट्री को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करने पर जोर
बैठक में भारत की डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने और उसे ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने डिफेंस सेक्टर से जुड़े नए और मॉडर्न कोर्स विकसित करने की जरूरत बताई।
उन्होंने ऐसे स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स तैयार करने पर जोर दिया, जो भविष्य में देश के डिफेंस इंडस्ट्री इकोसिस्टम की बढ़ती हुई ग्रोथ को पूरा कर देंगे।
समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण पर भी फोकस
प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जहाज निर्माण को पहले ही बुनियादी ढांचे की स्थिति दी जा चुकी है।
पीएम मोदी ने अधिकारियों से यह आकलन करने को कहा कि समुद्री क्षेत्र से जुड़े तय लक्ष्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति हो रही है या नहीं। उन्होंने इस क्षेत्र में चल रहे काम को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच विकास संवाद
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सरकारी अधिकारियों के बीच बेहतर टीम भावना और अनौपचारिक बातचीत की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ अधिकारियों के साथ ज्यादा व्यक्तिगत और अनौपचारिक बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
पीएम मोदी के अनुसार अलग-अलग कैडर और विभागों के अधिकारियों के बीच पेशेवर नेटवर्क मजबूत होंगे। ऐसे नेटवर्क भविष्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय और साझा उद्देश्यों की दिशा में काम करने में मदद कर सकते हैं।
सचिवों ने साझा किए अपने अनुभव और प्रतिभा
बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न योजनाओं के सचिवों ने अपने अनुभव, प्राथमिकताओं और उभरती चुनौतियों को भी साझा किया। अधिकारियों ने अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों की पॉलिसी लागू करने से जुड़ी समस्याओं और ग्राउंड लेवल पर सामने आ रही चर्चा की।
मीटिंग का वृहद फोकस लॉन्ग-टर्म गवर्नेंस, डेटा इंटीग्रेशन, एआई, इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन, डिफेंस, मैरीटाइम डेवलपमेंट और फ्यूचर-रेडी पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर रहा।

