नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को नई दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश ने जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलियों के प्रभाव को काफी हद तक खत्म कर दिया है, लेकिन अब वैचारिक या ‘दिमागी नक्सलवाद’ एक नई चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना जरूरी है, क्योंकि वे देश के विकास की राह में बाधा डालने और समाज में दोबारा अराजकता पैदा करने के अवसर तलाश रहे हैं।
सत्ता के गलियारों तक पहुंचने का PM मोदी ने किया दावा
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वैचारिक नक्सली देश की नीतियों और व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग सत्ता के गलियारों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं और सरकारी समितियों में सलाहकार की भूमिका तक निभा रहे हैं। पीएम मोदी के मुताबिक ये लोग अवसर की तलाश में हैं और हिंसा तथा अराजकता के रास्ते को फिर से बढ़ावा देने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे तत्वों की पहचान करके उन्हें अलग करना होगा, ताकि भारत लगातार विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहे।
नक्सलवाद ने युवाओं के भविष्य को किया प्रभावित
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के कारण हुई जान-माल की क्षति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने देश के कई युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, माओवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि यह संख्या युद्धों में मारे गए लोगों की संख्या से भी अधिक है। पीएम मोदी ने देश की सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी क्षमता का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में करने पर जोर दिया।
सीमाओं के साथ देश के भीतर की चुनौतियों पर भी नजर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज युद्ध केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने बदलते युद्ध के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसी रिफाइनरी, बैंकिंग सेक्टर, डेटा सेंटर या अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कारखानों और महत्वपूर्ण संस्थानों पर भी हमले हो सकते हैं। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष घोषित ‘Mission Sudarshanchakra’ का जिक्र किया और बताया कि इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का ऐलान
स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं और शिक्षा को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की प्रतिभा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश में 650 से अधिक नई यूनिवर्सिटीज की स्थापना की गई है, जिससे युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े हैं।
नई शिक्षा नीति और विदेशी डिग्री पर भी जोर
पीएम मोदी ने कहा कि देश में लंबे समय तक कोई नई शिक्षा नीति नहीं आई, लेकिन उनकी सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की। उन्होंने कहा कि अब विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत में आ रहे हैं और ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिसके माध्यम से भारतीय युवा देश में रहकर ही विदेशी डिग्री हासिल कर सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, कौशल और युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

