नई दिल्ली. झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं। दो सीटों के लिए मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है, जिसके चलते सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन और भाजपा नीत NDA दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच NDA ने अपने विधायकों को रांची के एक निजी होटल में ठहराया है। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने राजधानी स्थित होटल में कई कमरे बुक कराए हैं, जहां पार्टी के विधायक और समर्थित उम्मीदवार मौजूद हैं। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत कई वरिष्ठ नेता भी वहीं डेरा डाले हुए हैं। गठबंधन की योजना है कि मतदान के दिन सभी विधायक एक साथ होटल से विधानसभा पहुंचें, ताकि किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।
INDIA गठबंधन ने भी चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन ने भी चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने आवास पर गठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई और मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। इस दौरान विधायकों के लिए मॉक पोलिंग कराई गई, ताकि वे प्राथमिकता आधारित मतदान प्रणाली को अच्छी तरह समझ सकें और मतदान के दौरान किसी तकनीकी गलती से बचा जा सके।
INDIA गठबंधन राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। गठबंधन की ओर से जेमएम के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं। वहीं NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी चुनावी समीकरणों को रोचक बना रहे हैं।
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में किसी उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है। INDIA गठबंधन के पास बहुमत के आधार पर दोनों सीटें जीतने का दावा है, जबकि NDA के पास अपने समर्थन में करीब 25 विधायक हैं। ऐसे में NDA को जीत के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस पार्टी समर्थन हासिल कर जीत दर्ज कर चुके हैं
इस बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी सभी दलों के विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। वे विधायकों से अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने की अपील कर रहे हैं। नाथवानी इससे पहले भी झारखंड से राज्यसभा चुनाव में क्रॉस पार्टी समर्थन हासिल कर जीत दर्ज कर चुके हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी को हल्के में नहीं लिया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव से पहले दोनों खेमों की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि झारखंड का यह चुनाव केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि रणनीति, एकजुटता और राजनीतिक प्रबंधन की भी बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।

